MP Liquor Scam: मध्य प्रदेश शराब घोटाले पर कांग्रेस के 7 सवाल, 2.75 करोड़ की FDR पर विवाद
MP Liquor Scam: मध्य प्रदेश में शराब ठेकों से जुड़े कथित घोटाले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 2.75 करोड़ रुपये की कथित फर्जी ई-FDR, एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत और ठेकों की सिक्योरिटी में अनियमितताओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सात सवाल पूछे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में कथित शराब ठेका घोटाले को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने शराब दुकानों के कॉन्ट्रैक्ट और ट्रांसफर से जुड़े मामले में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जांच के आदेश देने की मांग की है। वहीं, इन आरोपों पर भाजपा और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की सोशल मीडिया पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार को संरक्षण नहीं दे रहे हैं, तो उन्हें इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।
शराब ठेका मामले में 2.75 करोड़ की ई-FDR पर सवाल
विवाद की शुरुआत एक मीडिया रिपोर्ट से हुई, जिसे जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। रिपोर्ट में भोपाल की दो शराब दुकानों के कॉन्ट्रैक्ट और ट्रांसफर से जुड़े मामलों में सात गंभीर अनियमितताओं का दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे प्रमुख सवाल 2,75,53,535 रुपये की ई-फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (ई-FDR) को लेकर है। दावा किया गया कि AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने संबंधित ई-FDR जारी करने से इनकार किया था। इसके बावजूद यह दस्तावेज कैसे स्वीकार किया गया, कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, इन आरोपों और दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री से पूछे सात सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपनी पोस्ट में पूछा कि मध्य प्रदेश में शराब ठेकों से जुड़ी कथित अनियमितताएं किसके संरक्षण में हुईं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी।
पटवारी ने कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोप का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ठेके हासिल करने के लिए रिश्वत का लेन-देन हुआ, तो यह किसके इशारे पर हुआ और इसकी जांच किस स्तर तक पहुंची है।
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मामले में कार्रवाई को लेकर पर्याप्त जवाब सामने नहीं आए हैं।
76 लाख रुपये की सिक्योरिटी किसने मंजूर की?
कांग्रेस ने शराब ठेकों से जुड़ी सिक्योरिटी जमा कराने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर भी सवाल उठाए हैं। जीतू पटवारी ने पूछा कि यदि बैंक ने 2.75 करोड़ रुपये की ई-FDR जारी ही नहीं की थी, तो उसे स्वीकार कैसे किया गया।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि नियमों के विपरीत कथित तौर पर 22 दिन की देरी से जमा की गई सिक्योरिटी को मंजूरी क्यों दी गई। इसके अलावा, बिना बैंक गारंटी के 76 लाख रुपये की सिक्योरिटी मंजूर किए जाने के फैसले के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने की मांग की गई।
कांग्रेस का कहना है कि इन बिंदुओं की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ठेका प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
वल्लभ भवन के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
जीतू पटवारी ने कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने सवाल किया कि यदि जांच में धोखाधड़ी या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कब की जाएगी।
कांग्रेस ने वल्लभ भवन में पदस्थ अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने की मांग उठाई है। पार्टी का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितताएं किन परिस्थितियों में हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
प्रधानमंत्री से निष्पक्ष जांच कराने की मांग
जयराम रमेश ने जीतू पटवारी के सवालों का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले की जांच के आदेश देने की मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि शराब ठेका प्रक्रिया में सामने आए सवालों का जवाब सरकार को देना चाहिए।
फिलहाल, इस मामले में कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों पर भाजपा या मध्य प्रदेश सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले में बैंक, संबंधित विभागों और प्रशासन की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

