मध्यप्रदेश में खनिजों की जांच एआई कैमरो और जांच उपकरणों से लैस चलित वाहनों से 

मध्यप्रदेश में लौह अयस्क की खदानों के पट्टेदार कम ग्रेड का बताकर रायल्टी चोरी नहीं कर सकेगा

विकास तिवारी, भोपाल

मध्यप्रदेश के जबलपुर, ग्वालियर और छतरपुर की लौह अयस्क की खदानों से निकलने वाले हाई ग्रेड के लौह अयस्क की निगरानी अब खनिज विभाग आधुनिक तकनीक से लैस चलित जांच वाहनों के जरिए करेगा। इसमें आर्टिफिशिल इंटेलीजेंस आधारित कैमरे, जीपीएस और आरएफआईडी टैग की मदद से लौह अयस्क के परिवहन की निगरानी की जाएगी। खदानों से लौह अयस्क निकालकर बेचने वाले ठेकेदार अब कम ग्रेड का लौह अयस्क बताकर रायल्टी की चोरी नहीं कर सकेंगे। औचक जांच होगी और ठेकेदार द्वारा बताए गए ग्रेड और लैब के परिणामों के आधार पर रायल्टी की वसूली की जाएगी।

मध्यप्रदेश में ग्वालियर, जबलपुर और छतरपुर में लौह अयस्क(आयरन कोर)की चालीस से अधिक खदानें है। यहां निकलने वाले लौह अयस्क के ग्रेड के अनुसार उसकी सिविल वेल्यू के आधार पर खनिज विभाग को खदान ठेकेदार रायल्टी का भुगतान करता है। अक्सर इसमें रायल्टी की चोरी होती है। ठेकेदार अपने स्तर पर नमूने एकत्रित करवाकर उसकी रिपोर्ट खनिज पोर्टल पर डाल देते है और कम ग्रेड का लौह अयस्क बताते हुए काफी कम रायल्टी का भुगतान करते है। इससे खनिज विभाग को हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। इसे रोकने अब एआई कैमरे से लैस चलित वाहनों के जरिए मौके पर पहुंचकर नमूने लेगा और उसकी अपनी प्रयोगशालाओं में जांच कर उसके आधार पर रायल्टी की वसूली करेगा। इसके जरिए लौह अयस्क के परिवहन और उससे मिलने वाली रायल्टी की सही वसूली हो सकेगी। खनिज की वास्तविक गुणवत्ता और श्रेणी के आधार पर शासन को रायल्टी मिलना इससे सुनिश्चित हो सकेगा।

 ऐसे होगी जांच-

खनिज विभाग ने प्रदेशभर के कलेक्टरों और जिला खनिज अधिकारियों को निर्देश जारी कर कहा है कि जिलों में लौह अयस्क के परिवहन में इस्तेमाल होंने वाले वाहनो की जांच के लिए विशेष चलित वाहन व्यवस्था विकसित की जाएगी। इन वाहनों से खनिज के नमूने लेने और उसका रासायनिक विश्लेषण करने के लिए आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। वाहनों में एआई आधारित कैमरे भी लगाए जाएंगे जो लौह अयस्क के बड़े टुकड़े और बारीक कण जैसी श्रेणियों की निगरानी करेंगे इससे खनिज की श्रेणी और उसके मूल्य के आंकलन में मदद मिलेगी। लौह अयस्क के परिवहन के लए इस्तेमाल होंने वाले अलग-अलग मार्गो पर चलित वाहन नमूने एकत्र करेगा। किस मार्ग पर नमूने लेने है इसका निर्धारण राज्य स्तर पर स्वचालित प्रणाली के माध्यम से होगा। जांच के लिए आधुनिक तकनीक से युक्त प्रयोगशाला भी स्थापित की जाएगी। यहां आकस्मिक रुप से लिए गए नमूनों का रासायनिक विश्लेषण किया जाएगा। ताकि खनिज की गुणवत्ता का सटीक पता लगाया जा सकेगा।

जीपीएस और आरएफआईडी से ट्रैक होेंगे वाहन-

नई व्यवस्था के तहत लौह अयस्क का परिवहन नियमानुसार पंजीकृत वाहनों से ही किया जाएगा। वाहनों में ट्रांसपोर्टर को जीपीएस लगाना होगा इसके अलावा वाहनों पर आरएफआईडी टैग लगवाना भी अनिवार्य होगा। इसके जरिए इन वाहनों की पहचान हो सकेगी। चलित वाहनों में आरएफआईडी टैग रीडर भी लगाए जाएंगे। इनकी मदद से खनिज परिवहन में इस्तेमाल होंने वाले वाहनों की जांच की जा सकेगी

खदानों के प्रवेश और निकासी द्वार पर सीसीटीवी-

खनन पट्टाधारक को अपनी स्वीकृत खदानों के प्रवेश और निकासी द्वार पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने होंगे। इन कैमरों से मिलने वाला डेटा भी विभागीय पोर्टल से जोड़ा जाएगा इससे खदान से खनिज के बाहर निकलने और उसके परिवहन की निगरानी में मदद मिलेगी। चलित वाहनों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनके माध्यम से मिलने वाले आंकड़े वास्तविक समय पर विभागीय पोर्टल पर प्रदर्शित होंगे। सीसीटीवी से प्राप्त वीडियो को छह माह तक सुरक्षित रखा जाएगा

 जांच के आंकड़ों के आधार पर तय होगी रायल्टी-

सरकार चलित वाहनों से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर लौह अयस्क की रायल्टी सुनिश्चित करेगी। लौह अयस्क की अलग अलग श्रेणियों का बिक्री मूल्य अलग-अलग होता है। ऐसे में खनिज की गुणवत्ता और श्रेणी की सही पहचान रायल्टी की गणना के लिए महत्वपूर्ण है।

 यह होगा फायदा– लौह अयस्क की श्रेणी और गुणवत्ता की बेहतर जांच हो सकेगी। निगरानी आसान होगी पारदर्शिता बढ़ेगी और रायल्टी की सही गणना और सही राजस्व वसूली करने में मदद मिलेगी।उल्लंघन करने वाले पट्टाधारकों पर कार्यवाही हो सकेगी