‘कमीशन तय नहीं, कोई खुशी से दे तो मना नहीं करते…’ इंजीनियर के इस बयान पर मचा बवाल, सरकार ने किया सस्पेंड
जलसंसाधन विभाग के ईई अहिरवार का रिश्वत और कमीशन को लेकर बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शासन ने की कार्रवाई
भोपाल। रिश्वत और कमीशन को लेकर मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग के एक इंजीनियर की साफगोई उनपर भारी पड़ गई। सोशल मीडिया पर बयान वायरल होने के बाद जल संसाधन विभाग के अपर सचिव रविंद्र कुमार चौधरी ने उन्हें निलंबित करते हुए प्रमुख अभियंता जलससाधन विभाग भोपाल में अटैच कर दिया है।
पन्ना जिले में पदस्थ जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री सी.बी. अहिरवार ने मीडिया से बातचीत के दौरान कमीशन और रिश्वत को लेकर कुछ ऐसी बातें कहीं, जिनके सामने आने के बाद विभाग में हलचल मच गई।
‘कोई खुशी से दे तो लेने से इनकार नहीं’
दरअसल, मीडिया से बातचीत के दौरान कार्यपालन यंत्री सी.बी. अहिरवार ने कहा कि उनका कोई निश्चित कमीशन या प्रतिशत तय नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी किसी से रिश्वत नहीं मांगी, लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी खुशी या प्यार से कुछ दे देता है तो वे उसे लेने से इनकार नहीं करते। उन्होंने बातचीत में यह भी कहा कि नौकरी की शुरुआत से ही उनका यही रवैया रहा है।
उनका यह बयान कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बयान को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। सरकारी विभाग में पदस्थ एक वरिष्ठ इंजीनियर की ओर से इस तरह की टिप्पणी किए जाने को लेकर सवाल उठने लगे।
लोकायुक्त की कार्रवाई के बीच सामने आया बयान
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई भी चर्चा में है। ग्वालियर के एक ठेकेदार की शिकायत पर संभागीय लेखा अधिकारी दीपक सिंह परमार और सहायक ग्रेड-2 अरविंद कुमार पाठक के खिलाफ पैतालिस हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में कार्रवाई की गई थी। आरोप था कि निर्माण कार्य के अंतिम बिल के भुगतान के बदले रिश्वत की मांग की गई थी।
इस मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद विभागीय कार्यप्रणाली और कमीशनखोरी को लेकर सवाल उठ रहे थे। इसी बीच कार्यपालन यंत्री सी.बी. अहिरवार का बयान सामने आ गया।
शासन ने तत्काल प्रभाव से किया निलंबित
वीडियो वायरल होने और बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद मध्यप्रदेश शासन ने 30 अक्टूबर 2026 को कार्यपालन यंत्री सी.बी. अहिरवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। शासन ने उनके बयान को मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के विपरीत माना है।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय भोपाल स्थित जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय निर्धारित किया गया है।
बयान ने खड़े किए कई सवाल
इस पूरे मामले ने सरकारी विभागों में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि एक ओर सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी का सार्वजनिक रूप से यह कहना कि कोई अपनी खुशी से कुछ दे तो वे मना नहीं करते, प्रशासनिक आचरण को लेकर नई बहस छेड़ गया है।
फिलहाल इस मामले में सबसे अधिक चर्चा इंजीनियर के उसी बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने कमीशन का कोई प्रतिशत तय नहीं होने की बात कहते हुए स्वेच्छा से मिलने वाली रकम स्वीकार करने की बात कही थी।

