देवास शराब कांड में बड़ा एक्शन: कलेक्टर-SP हटाने के बाद तीन आबकारी अधिकारी सस्पेंड, विभाग में मचा हड़कंप

 

चंदाना-बिंजाना में मौतों के मामले में सरकार की कार्रवाई तेज; जिला आबकारी अधिकारी बसंती भूरिया, सहायक जिला आबकारी अधिकारी नीलेश पवार और आबकारी उप निरीक्षक राजश्री खन्ना निलंबित

भोपाल/देवास। मध्यप्रदेश के देवास जिले में कथित जहरीली शराब से मौतों के मामले में सरकार ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को हटाए जाने के बाद अब आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें जिला आबकारी अधिकारी बसंती भूरिया, सहायक जिला आबकारी अधिकारी नीलेश पवार और आबकारी उप निरीक्षक राजश्री खन्ना शामिल हैं।

लगातार सामने आ रही मौतों, अवैध शराब की बिक्री के आरोपों और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवालों के बीच इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने देवास के तीनों अधिकारियों को निलंबित करने के अधिकृत आदेश भी जारी कर दिए हैं।

13 मौतों के बाद बढ़ा विवाद

देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में सितंबर के अंत से अक्टूबर के मध्य तक कई लोगों की मौत का मामला सामने आया। परिजनों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मृतकों ने शराब का सेवन किया था और इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ी। कुछ मामलों में आंखों की रोशनी प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आईं।

इन दोनों गांवों में करीब 20 दिनों के दौरान 13 मौते होने की खबर  है। हालांकि, इन सभी मौतों का जहरीली शराब से संबंध अभी जांच का विषय है। जिला प्रशासन ने शुरुआत में जहरीली शराब से सामूहिक मौतों के दावों को खारिज किया था। बाद में मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई।

कलेक्टर और एसपी को भी हटाया गया

मामले के तूल पकड़ने के बाद राज्य सरकार ने देवास के तत्कालीन कलेक्टर ऋतुराज सिंह और पुलिस अधीक्षक पुनीत गहलोत को पद से हटा दिया। नई प्रशासनिक व्यवस्था के तहत नेहा मीना को देवास का कलेक्टर और आईपीएस अधिकारी आदित्य मिश्रा को पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।

कलेक्टर और एसपी के बाद अब आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आने से मामले में विभागीय जवाबदेही का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है।

अवैध शराब के नेटवर्क पर पुलिस की कार्रवाई

इस प्रकरण में पुलिस ने कथित अवैध शराब कारोबार से जुड़े 10 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी दी है। गिरफ्तार लोगों में शराब दुकानों के प्रबंधक और सेल्समैन भी शामिल बताए गए हैं। पुलिस ने करीब 7.25 लाख रुपये मूल्य की सामग्री जब्त करने की बात कही है।

जांच का प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि अवैध रूप से शराब की बिक्री किस तरह हो रही थी, उसकी आपूर्ति कहां से की जा रही थी और इस गतिविधि में कौन-कौन शामिल था। जब्त शराब के नमूनों की फॉरेंसिक जांच भी महत्वपूर्ण होगी।

15 दिन में रिपोर्ट देगी जांच समिति

मामले की गंभीरता को देखते हुए उज्जैन संभाग के आयुक्त ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को मौतों के कारणों, घटनाक्रम और संबंधित तकनीकी एवं प्रशासनिक पहलुओं की जांच कर 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मौतों के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और अवैध शराब की बिक्री या प्रशासनिक स्तर पर किसी चूक की भूमिका रही या नहीं।

अब जांच के नतीजों पर नजर

देवास की घटना ने अवैध शराब की बिक्री पर निगरानी, संबंधित विभागों की जिम्मेदारी और समय रहते कार्रवाई करने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों के निलंबन और प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल, जहरीली शराब से सभी मौतों की आधिकारिक पुष्टि और निलंबित अधिकारियों के विरुद्ध लगाए गए विशिष्ट आरोपों को अंतिम रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। इन बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट और शासन के आधिकारिक आदेश स्थिति स्पष्ट करेंगे।