14 साल पुराने डकैती केस में फंसे पंचायत अधिकारी की गई नौकरी, मऊगंज के पूर्व CEO रामकुशल मिश्रा बर्खास्त

 

अदालत से सजा मिलने के करीब 14 साल बाद पंचायत राज संचालनालय ने की बड़ी कार्रवाई, धारा 395 के तहत तीन साल का सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा बनी बर्खास्तगी का आधार

मऊगंज।मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामला सामने आया है। जनपद पंचायत मऊगंज के पूर्व प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) रामकुशल मिश्रा को शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। पंचायत राज संचालनालय, भोपाल ने 5 नवंबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया।

मिश्रा वर्तमान में जनपद पंचायत हनुमना में पंचायत समन्वय अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। उनकी बर्खास्तगी का आधार वर्ष 2007 में दर्ज आपराधिक प्रकरण में न्यायालय से हुई दोषसिद्धि और 20 अप्रैल 2012 को सुनाई गई सजा है। इस मामले में न्यायालय ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 395 के तहत दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।

40 मिनट के कार्यक्रम में 14 लाख के खर्च का विवाद भी आया था सामने

रामकुशल मिश्रा का नाम इससे पहले भी मऊगंज में एक सरकारी कार्यक्रम के खर्च को लेकर विवादों में आया था। वर्ष 2025 में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत ग्राम खैरा में आयोजित कार्यक्रम के खर्च को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। 17 अप्रैल 2025 को आयोजित इस कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम शामिल हुए थे। कार्यक्रम करीब 40 मिनट चला था।

इस आयोजन के लिए टेंट, लाइट, नाश्ते, किराना सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर लाखों रुपये के खर्च का मामला सामने आया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कार्यक्रम में करीब 150 लोगों की मौजूदगी थी। आरोप लगे थे कि आयोजन के लिए गद्दे और चादरों के किराये तक के बिल लगाए गए, जबकि मौके पर इन व्यवस्थाओं की आवश्यकता और उपलब्धता को लेकर सवाल उठे थे।

इस आयोजन के भुगतान को लेकर भी विवाद हुआ था। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, पंचायत दर्पण पोर्टल पर उपलब्ध नोटशीट में 2.54 लाख रुपये की स्वीकृति का उल्लेख था, जबकि 7.45 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाले जाने की बात सामने आई थी। एक ही वेंडर के माध्यम से टेंट, लाइट, नाश्ता, मिठाई और अन्य व्यवस्थाओं के बिल लगाए जाने पर भी सवाल उठे थे।

मामले में तत्कालीन लेखापाल की ओर से भी रामकुशल मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायतें सामने आने के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए थे। बाद में मिश्रा को मऊगंज से हटाकर कलेक्टर कार्यालय में संलग्न किया गया और फिर जनपद पंचायत हनुमना में पदस्थ किया गया।

सेवा से बर्खास्तगी के लिए किन नियमों का लिया गया सहारा?

अब पुराने आपराधिक मामले में न्यायालय की दोषसिद्धि को आधार बनाकर पंचायत राज संचालनालय ने उनके खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई की है। विभागीय आदेश के मुताबिक, मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 10(9) के तहत पदच्युत करने की दीर्घशास्ति अधिरोपित की गई है। वहीं, उनके कृत्य को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के उपनियम 1 एवं 3 के उल्लंघन से भी जोड़ा गया है।

14 साल तक विभाग को क्यों नहीं हुई कार्रवाई की जरूरत?

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि न्यायालय ने 20 अप्रैल 2012 को ही रामकुशल मिश्रा को दोषी ठहराते हुए सजा सुना दी थी, लेकिन इसके बावजूद वे लंबे समय तक शासकीय सेवा में बने रहे। इस दौरान वे पंचायत सचिव से लेकर पंचायत समन्वय अधिकारी और जनपद पंचायत मऊगंज के प्रभारी CEO जैसे दायित्वों तक पहुंचे।

अब 5 नवंबर 2026 को जारी बर्खास्तगी आदेश के बाद विभागीय निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर न्यायालय की दोषसिद्धि के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई में करीब 14 साल का समय क्यों लगा? संबंधित कर्मचारी की सेवा में निरंतरता और पदस्थापना के दौरान न्यायालय के फैसले की जानकारी विभाग को थी या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।

फिलहाल बर्खास्तगी की कार्रवाई का आधार न्यायालय की दोषसिद्धि है। पुराने कार्यक्रम के खर्च को लेकर सामने आए आरोप अलग प्रशासनिक विवाद का विषय हैं, उन्हें बर्खास्तगी का प्रत्यक्ष आधार नहीं माना जाना चाहिए।