65 लाख वेतन पाने वाले सहकारी समिति प्रबंधक के पास मिली 2.41 करोड़ की संपत्ति! लोकायुक्त के छापे में आलीशान मकान, जमीन, JCB और लग्जरी गाड़ियां उजागर

 

धार में लोकायुक्त इंदौर की तीन टीमों की एक साथ कार्रवाई; नालछा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक शेरसिंह ठाकुर के ठिकानों पर छापे, आय से 271.46 प्रतिशत अधिक संपत्ति का प्रारंभिक आकलन

धार/इंदौर। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर लोकायुक्त की तीन अलग-अलग टीमों ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को धार जिले के नालछा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक शेरसिंह ठाकुर के सोडपुर, नालछा और मांडव स्थित ठिकानों पर एक साथ छापेमार कार्रवाई की। शुरुआती जांच में करीब 2 करोड़ 41 लाख 45 हजार रुपये की संपत्ति और खर्च का पता चला है। वहीं, आरोपी की पूरे सेवाकाल की अनुमानित वैध वेतन आय लगभग 65 लाख रुपये बताई गई है। इस आधार पर लोकायुक्त ने उसकी संपत्ति और खर्च को आय से 271.46 प्रतिशत अधिक आंका है।

लोकायुक्त के अनुसार, शेरसिंह ठाकुर ने लगभग 20 वर्षों की नौकरी के दौरान अपनी ज्ञात वैध आय के अनुपात में काफी अधिक संपत्ति अर्जित की। जांच में आलीशान दो मंजिला मकान, व्यावसायिक भवन, पत्नी के नाम कृषि भूमि, जेसीबी मशीन, ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन और अन्य कृषि उपकरणों की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा एक अन्य कथित बेनामी भवन की जानकारी भी मिली है, जिसका सत्यापन किया जा रहा है।

65 लाख की आय, खर्च और संपत्तियों का आंकड़ा 2.41 करोड़ रुपये

लोकायुक्त की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी शेरसिंह ठाकुर को अपने पूरे सेवाकाल में वेतन के रूप में लगभग 65 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं। इसके मुकाबले उसके द्वारा अर्जित संपत्तियों और अन्य मदों में किए गए खर्च का अनुमान 2 करोड़ 41 लाख 45 हजार रुपये लगाया गया है।

इस तरह घोषित और ज्ञात वैध आय की तुलना में संपत्ति का अंतर काफी अधिक पाया गया है। लोकायुक्त ने प्रारंभिक आकलन में इसे 271.46 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति माना है। इसी आधार पर आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, यह आकलन प्रारंभिक है और अंतिम संपत्ति मूल्यांकन तथा आय के सभी स्रोतों की जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

सोडपुर में 97 लाख रुपये का दो मंजिला आलीशान मकान

लोकायुक्त की जांच में आरोपी की सबसे बड़ी संपत्ति ग्राम सोडपुर, नालछा जिला धार में सामने आई है। यहां आरोपी के कब्जे से जुड़े 0.1520 हेक्टेयर भूखंड की जानकारी मिली है। इस जमीन पर करीब 2400 वर्गफीट क्षेत्र में दो मंजिला भव्य भवन का निर्माण कराया गया है।

लोकायुक्त के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, भूखंड की खरीद और भवन निर्माण पर करीब 97 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इस संपत्ति को कथित बेनामी संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया है। जांच दल इसके स्वामित्व और निवेश के वास्तविक स्रोतों की पड़ताल कर रहा है।

मांडव रोड पर 20 लाख का व्यावसायिक भवन

आरोपी के नाम से जुड़ी एक अन्य संपत्ति ग्राम नालछा में मांडव रोड स्थित सोडपुर तिराहे पर मिली है। यहां करीब 1350 वर्गफीट का भवन खरीदा गया है, जिसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाता है।

लोकायुक्त ने इस भवन की अनुमानित कीमत और खरीद पर किए गए खर्च को करीब 20 लाख रुपये आंका है। इस संपत्ति के दस्तावेजों और खरीद में प्रयुक्त धनराशि की भी जांच की जा रही है।

पत्नी के नाम पर दो स्थानों पर कृषि भूमि

जांच में आरोपी की पत्नी कविता ठाकुर के नाम पर भी कृषि भूमि खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। लोकायुक्त के मुताबिक, पहली जमीन ग्राम सोडपुर, तहसील पीथमपुर, जिला धार में 0.645 हेक्टेयर है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 8 लाख रुपये बताई गई है।

इसी तरह दूसरी कृषि भूमि ग्राम मांडव, तहसील पीथमपुर, जिला धार में 2.526 हेक्टेयर क्षेत्रफल की है। इस जमीन पर लगभग 42 लाख रुपये खर्च किए जाने का प्रारंभिक आकलन है।

लोकायुक्त अब इन जमीनों की खरीद के दस्तावेज, भुगतान के स्रोत और वास्तविक स्वामित्व की जांच कर रहा है। यह भी देखा जाएगा कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए धनराशि कहां से आई थी।

JCB, ट्रैक्टर, TUV और बुलेट सहित वाहनों का जखीरा

शेरसिंह ठाकुर के यहां केवल जमीन और मकान ही नहीं, बल्कि वाहनों और कृषि उपकरणों में भी बड़ा निवेश सामने आया है। लोकायुक्त के अनुसार, आरोपी ने जेसीबी मशीन, महिंद्रा ट्रैक्टर, महिंद्रा TUV, ऑल्टो कार, बुलेट मोटरसाइकिल और विभिन्न कृषि यंत्र-संयंत्र खरीदे हैं।

इन सभी वाहनों और उपकरणों पर लगभग 53 लाख रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। इसके अलावा आरोपी से संबंधित संपत्तियों पर अन्य कृषि संयंत्र, ट्रैक्टर और ट्रॉलियां भी रखी मिली हैं। इनका स्वामित्व निर्धारित करने और वास्तविक कीमत का आकलन करने की कार्रवाई जारी है।

एक और बेनामी भवन की जानकारी, सत्यापन जारी

लोकायुक्त की जांच में आरोपी के स्वामित्व से जुड़े एक अन्य बेनामी भवन की जानकारी भी प्राप्त हुई है। फिलहाल इस भवन के संबंध में दस्तावेजों और वास्तविक स्वामित्व का सत्यापन किया जा रहा है।

जांच दल यह भी पता लगा रहा है कि आरोपी ने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर कितनी संपत्तियां अर्जित की हैं तथा उनमें से किन संपत्तियों में उसकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है।

तीन टीमों ने तीन स्थानों पर एक साथ शुरू की कार्रवाई

लोकायुक्त संगठन इंदौर ने यह कार्रवाई सुनियोजित तरीके से की। आरोपी के ग्राम सोडपुर, ग्राम नालछा और ग्राम मांडव स्थित ठिकानों पर तीन अलग-अलग टीमों ने एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

यह कार्रवाई लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश पर, उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त इंदौर राजेश सहाय के नेतृत्व में की जा रही है।

कार्रवाई में डीएसपी आनंद चौहान, निरीक्षक आशुतोष मिठास, निरीक्षक श्रीमती प्रतिभा तोमर और निरीक्षक सचिन पटेरिया की अलग-अलग टीमें शामिल हैं।

लोकायुक्त सर्च दल में एएसआई रहीम खान, प्रधान आरक्षक विजय कुमार, रणजीत द्विवेदी, प्रमोद यादव, विवेक मिश्रा और आशीष शुक्ला सहित आरक्षक पवन पटोरिया, शैलेन्द्र सिंह बघेल, रामेश्वर निंगवाल, आदित्य सिंह भदौरिया, सतीश यादव, चन्द्रमोहन बिष्ट, कमलेश परिहार, आशीष नायडू, मनीष माथुर और श्रीकृष्ण अहिरवार शामिल हैं।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

लोकायुक्त संगठन ने आरोपी शेरसिंह ठाकुर के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। इसके बाद से ही आरोपी के विभिन्न ठिकानों पर सर्च और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

फिलहाल लोकायुक्त की टीमें मकान, जमीन, वाहनों, कृषि उपकरणों और अन्य संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज जुटा रही हैं। साथ ही बैंक खातों, निवेश, संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल की गई धनराशि और परिवार के सदस्यों के नाम पर अर्जित संपत्तियों की भी पड़ताल की जाएगी।

20 साल की नौकरी, 65 लाख रुपये की अनुमानित वेतन आय और 2.41 करोड़ रुपये की संपत्ति का प्रारंभिक आकलन—धार में लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने सहकारी संस्थाओं में पदस्थ अधिकारियों की संपत्ति और आय के स्रोतों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपी ने कितनी संपत्ति वैध आय से अधिक अर्जित की है।