सागर SP की कुर्सी छिनी तो IPS सेवा से ही दे दिया इस्तीफा! अनुराग सुजानिया के फैसले से पुलिस महकमे में भूचाल

 

चार दिन पहले सागर से हटाकर PHQ में AIG बनाया, 2 नवंबर को सौंपा त्यागपत्र; बंडा जहरीली शराब कांड के बाद हुई थी कार्रवाई

भोपाल। मध्यप्रदेश के पुलिस महकमे में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। सागर के पुलिस अधीक्षक पद से हटाए गए 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) से इस्तीफा दे दिया है। खास बात यह है कि जिस अधिकारी को चार दिन पहले ही सागर एसपी की जिम्मेदारी से हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) बनाया गया था, उन्होंने नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालने के बजाय सेवा छोड़ने का फैसला कर लिया।

सुजानिया ने 2 नवंबर 2026 को अपना इस्तीफा सौंपा। उन्होंने इसके पीछे व्यक्तिगत कारण बताए हैं। हालांकि, इस्तीफे का समय और इसके ठीक पहले हुआ तबादला कई सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस महकमे में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यानी सुजानिया का त्यागपत्र देना तय है, लेकिन उनकी सेवा से औपचारिक विदाई का फैसला अभी बाकी है।

27 अक्टूबर को हटाए गए थे सागर एसपी, 2 नवंबर को दे दिया इस्तीफा

दरअसल, राज्य सरकार ने 27 अक्टूबर को आईपीएस अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव किया था। इस फेरबदल में सागर के तत्कालीन एसपी अनुराग सुजानिया को जिले से हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय में AIG पदस्थ किया गया था। उनकी जगह संजीव कुमार सिन्हा को सागर का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया।

सुजानिया करीब छह महीने से सागर जिले में एसपी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनका तबादला ऐसे समय हुआ, जब जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के केंद्र में था। तबादले के महज चार दिन बाद इस्तीफा सामने आने से इस पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस महकमे के कुछ सूत्रों का दावा है कि अचानक हुए तबादले से सुजानिया असहज थे। हालांकि, इस संबंध में अधिकारी की ओर से कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। उनके इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख ही बताया गया है। इसलिए तबादले को इस्तीफे का निश्चित कारण मानना फिलहाल उचित नहीं होगा।

सुजानिया के तबादले की पृष्ठभूमि में सागर जिले का बंडा जहरीली शराब कांड है। इस घटना में अवैध रूप से बनाई गई जहरीली शराब के सेवन से कई लोगों की मौत हुई थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस मामले में कम से कम 16 मौतों की पुष्टि हुई थी, जबकि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या इससे अधिक बताई गई।

घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे। अवैध शराब का निर्माण और वितरण कैसे होता रहा? स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी पुलिस तक क्यों नहीं पहुंची? अवैध कारोबार पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ऐसे सवालों के बीच राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव किया।

सागर के कलेक्टर और एसपी दोनों को हटा दिया गया। अनुराग सुजानिया को पुलिस मुख्यालय भेजा गया और उनकी जगह संजीव कुमार सिन्हा को जिले की कमान सौंपी गई।

इस मामले की जांच और अवैध शराब के नेटवर्क की पड़ताल भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी। सुजानिया इस प्रकरण की जांच की निगरानी कर रहे थे। ऐसे समय उनका तबादला और उसके बाद इस्तीफा पुलिस महकमे के लिए असामान्य घटनाक्रम बन गया।

मुरैना के जहरीली शराब कांड में भी चर्चा में आए थे सुजानिया

अनुराग सुजानिया का नाम जहरीली शराब से जुड़े मामलों में पहली बार चर्चा में नहीं आया है। वर्ष 2021 में मुरैना जिले में हुए जहरीली शराब कांड ने भी पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। इस घटना में 24 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

उस समय भी अवैध शराब के कारोबार और पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। सुजानिया मुरैना में भी पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। सागर में जहरीली शराब कांड के बाद उनका फिर चर्चा में आना और उसके बाद इस्तीफा देना उनके प्रशासनिक करियर का बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

हालांकि, मुरैना और सागर की घटनाओं का उल्लेख उनके पूर्व पदस्थापनाओं के संदर्भ में है। इन घटनाओं के आधार पर उनकी व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी या दोष साबित नहीं होता।

मुख्यमंत्री की पुलिस मुख्यालय में बैठक, वरिष्ठ अधिकारियों से कानून-व्यवस्था पर चर्चा

इधर, सुजानिया के इस्तीफे की खबर सामने आने के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार शाम वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री का पुलिस मुख्यालय पहुंचकर अधिकारियों के साथ बैठक करने का कार्यक्रम था। इस बैठक को प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

बैठक के एजेंडे में प्रदेश में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था की स्थिति, पुलिस की जवाबदेही और गंभीर घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई जैसे विषय प्रमुख रहे। सागर में जहरीली शराब कांड के बाद हुए प्रशासनिक बदलाव और पुलिस महकमे में सामने आए ताजा घटनाक्रम के बीच इस बैठक को लेकर विशेष चर्चा रही।

हालांकि, मुख्यमंत्री की बैठक को सुजानिया के इस्तीफे से सीधे जोड़ने का कोई आधिकारिक आधार सामने नहीं आया है। इसी तरह बैठक में किसी विशेष अधिकारी पर कार्रवाई, नई जांच या इस्तीफे को लेकर निर्णय होने की पुष्टि भी उपलब्ध नहीं है। बैठक के आधिकारिक निर्णयों और निर्देशों को लेकर शासन की ओर से जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

कौन हैं अनुराग सुजानिया?

अनुराग सुजानिया मध्यप्रदेश कैडर के 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले सुजानिया ने एमटेक की पढ़ाई की है। उन्होंने 2 दिसंबर 2014 को आईपीएस सेवा में प्रवेश किया था और दिसंबर 2017 में उनकी सेवा की पुष्टि हुई थी।

अपने करियर के दौरान उन्होंने कई जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वे टीकमगढ़, मंदसौर, मुरैना और सागर में पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं। इसके अलावा करेरा में एसडीओपी के रूप में भी सेवाएं दी हैं।

सागर में करीब छह महीने तक एसपी रहने के बाद 27 अक्टूबर को उन्हें पुलिस मुख्यालय भोपाल में AIG बनाया गया था। लेकिन इस नई पदस्थापना के चार दिन बाद ही उनका इस्तीफा सामने आ गया।

अब शासन के फैसले पर टिकी निगाहें

सुजानिया का इस्तीफा अब शासन के स्तर पर विचार और स्वीकृति की प्रक्रिया से गुजरेगा। इस्तीफा सौंपने के साथ ही कोई आईपीएस अधिकारी तत्काल सेवा से मुक्त नहीं हो जाता। सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति और नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उनकी सेवा से विदाई औपचारिक रूप से संभव होगी।

इस पूरे मामले में तीन बातें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। पहली, सागर के बंडा जहरीली शराब कांड के बाद सरकार ने जिले के पुलिस और प्रशासनिक नेतृत्व में बदलाव किया। दूसरी, एसपी पद से हटाए जाने के चार दिन बाद ही अनुराग सुजानिया ने आईपीएस सेवा से इस्तीफा दे दिया। तीसरी, मुख्यमंत्री ने इसी दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था को लेकर बैठक की।

फिलहाल सुजानिया ने अपने इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत कारण बताए हैं। लेकिन उनके फैसले के समय ने पुलिस महकमे में कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि राज्य सरकार उनके इस्तीफे पर क्या फैसला लेती है और इस पूरे घटनाक्रम पर पुलिस नेतृत्व की ओर से आगे क्या प्रतिक्रिया आती है।