इंदौर-भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक कॉरिडोर विकसित होगा,सोयाबीन पर मिलेगा भावांतर
जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास की तैयारी, विशेष कंपनी गठित करने के प्रस्ताव पर कैबिनेट में चर्चा
सात जिलों में विकसित किए जा सकेंगे पांच आर्थिक हब, शुरुआती पूंजी के तौर पर ₹100 करोड़ की इक्विटी का प्रस्ताव
भोपाल। मध्य प्रदेश में औद्योगिक निवेश को गति देने और क्षेत्रीय स्तर पर नियोजित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश में इंदौर-भोपाल-जबलपुर के बीच 600 किलोमीटर के एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। 15 अक्टूबर 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस कॉरिडोर के समेकित विकास के लिए एक विशेष प्रयोजन साधन (एसपीवी) कंपनी गठित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। प्रस्ताव के तहत कंपनी का नाम जबलपुर-भोपाल-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (JBIECD) रखने की बात है। इसका उद्देश्य कॉरिडोर के अंतर्गत बड़े, नियोजित और आपस में जुड़े औद्योगिक एवं आर्थिक हब विकसित करना है। इसके अलावा किसानों को सोयाबीन पर भावांतर देने पर भी चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
इंडस्ट्रियल करिडोर में प्रस्तावित कंपनी का पूर्ण स्वामित्व राज्य शासन के पास रहेगा। इसके लिए शुरुआती पेड-अप इक्विटी के रूप में 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही, शुरुआती कार्यशील पूंजी के लिए 20 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त ऋण देने का प्रावधान प्रस्ताव में शामिल है। परियोजनाओं के आकार और जरूरत के अनुसार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), संस्थागत वित्त, भूमि मुद्रीकरण, लीज प्रीमियम और उपयोगकर्ता शुल्क जैसे माध्यमों से भी संसाधन जुटाए जा सकेंगे।
सात जिलों में पांच आर्थिक हब की परिकल्पना
कॉरिडोर के तहत जबलपुर, नरसिंहपुर-रायसेन, भोपाल, सीहोर-देवास और इंदौर क्षेत्र में पांच संभावित आर्थिक हब विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इन क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों, औद्योगिक संभावनाओं, बाजार की मांग और निवेशकों की रुचि के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
जबलपुर क्षेत्र में इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा एवं एयरोस्पेस से जुड़े सहायक उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने की योजना है। नरसिंहपुर-रायसेन क्षेत्र में कृषि प्रसंस्करण, फूड पार्क, वेयरहाउसिंग और कृषि आधारित उद्योगों की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
भोपाल क्षेत्र में आईटी, टेक्नोलॉजी, नॉलेज सर्विसेज, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा आवासीय एवं सामाजिक अवसंरचना पर ध्यान दिया जा सकता है। सीहोर-देवास क्षेत्र में फूड एवं एग्री प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और वेयरहाउसिंग को प्राथमिकता देने की परिकल्पना है। वहीं, इंदौर क्षेत्र में आईटी, टेक्नोलॉजी, उन्नत विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और सेवाओं के विस्तार के साथ पीथमपुर के औद्योगिक इकोसिस्टम से जुड़ाव को महत्वपूर्ण माना गया है।
हालांकि, इन हब के अंतिम स्थान और उद्योगों का चयन तकनीकी अध्ययन के बाद किया जाएगा। इसके लिए भूमि की उपयुक्तता, पानी और बिजली की उपलब्धता, पर्यावरणीय पहलुओं, कनेक्टिविटी, बाजार की मांग तथा निवेशकों की रुचि का आकलन किया जाएगा। इसमें पीएम गति शक्ति पोर्टल की मदद लेने का भी प्रस्ताव है।
सड़क निर्माण नहीं, औद्योगिक सुविधाओं के विकास पर रहेगा जोर
प्रस्तावित एसपीवी कंपनी को सड़क निर्माण एजेंसी के रूप में काम नहीं करना है। मुख्य सड़कों का निर्माण लोक निर्माण विभाग अथवा संबंधित सड़क निर्माण एजेंसियों के दायरे में रहेगा। कंपनी की मुख्य भूमिका औद्योगिक हब के विकास, आंतरिक आधारभूत सुविधाओं, भूमि नियोजन, परियोजनाओं की तैयारी और निवेशकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की होगी।
योजना के तहत पहले से नियोजित भूमि, उपयोगिताओं और साझा सुविधाओं से युक्त ऐसे औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की परिकल्पना है, जहां निवेशक आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध होने पर अपेक्षाकृत तेजी से अपनी परियोजनाएं शुरू कर सकें। सेक्टर आधारित क्लस्टर विकसित होने से बड़े निवेशकों के साथ सहायक उद्योगों को भी अवसर मिलने की उम्मीद है।
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मध्य प्रदेश में इंदौर-भोपाल-जबलपुर के बीच 600 किलोमीटर के एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किया जाएगा
प्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से इंदौर, भोपाल और जबलपुर को जोड़ने वाले प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। करीब 600 किलोमीटर के इस मार्ग के आसपास विभिन्न स्थानों पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के प्रस्ताव पर कैबिनेट में चर्चा की गई।
प्रस्ताव के तहत कॉरिडोर के विकास और प्रबंधन के लिए विशेष प्रयोजन कंपनी यानी स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) गठित करने पर भी विचार किया गया। यह कंपनी औद्योगिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान, विकास की योजना और संबंधित प्रक्रियाओं के समन्वय में भूमिका निभा सकती है।
इस योजना को मंजूरी मिलने से प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों के बीच औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में काम आगे बढ़ सकता है।
सांदीपनि विद्यालयों में विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाने वाली बस सुविधा के किराये की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई । स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, बसों का किराया निर्धारित करने का अधिकार जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति को देने पर विचार किया गया।
इस व्यवस्था का उद्देश्य जिले की परिस्थितियों के अनुसार बस किराया तय करने की प्रक्रिया निर्धारित करना है।
सांदीपनि विद्यालयों में परिवहन सुविधा विद्यार्थियों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रदेश के सोयाबीन उत्पादकों के लिए भावांतर भुगतान योजना भी महत्वपूर्ण है। इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में उपज का भाव निर्धारित आधार मूल्य से कम मिलने की स्थिति में पात्र किसानों को अंतर की राशि उपलब्ध कराना है। योजना के तहत किसानों को निर्धारित नियमों, पंजीयन और बिक्री संबंधी शर्तों का पालन करना होता है।
खरीफ वर्ष 2026 के लिए सोयाबीन उत्पादकों के पंजीयन की प्रक्रिया 3 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक निर्धारित किए जाने की जानकारी पहले ही सामने आ चुकी है। किसानों को ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीयन कराना है।
भावांतर व्यवस्था के तहत सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार बाजार मूल्य और निर्धारित आधार मूल्य के अंतर की गणना की जाती है। यह सीधे तौर पर सरकारी खरीद की व्यवस्था से अलग है, क्योंकि इसमें योजना की शर्तों के अनुसार मूल्य अंतर की भरपाई की जाती है।
सोयाबीन के बाजार भाव और किसानों की आय को देखते हुए इस योजना का क्रियान्वयन महत्वपूर्ण है।
नए जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालयों का प्रस्ताव
कैबिनेट के संभावित एजेंडे में नवगठित जिलों में प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई । पांढुर्णा, मैहर, मऊगंज और निवाड़ी में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यालय खोलने तथा इनके संचालन के लिए आवश्यक पदों की व्यवस्था करने पर विचार किया गया ।
ऐसा होने पर संबंधित जिलों में विभागीय योजनाओं के संचालन और निगरानी के लिए जिला स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है।
बैठक में प्रदेश की बिजली मांग और उपलब्ध आपूर्ति की स्थिति पर ऊर्जा विभाग की ओर से प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और कटौती से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा की गई।
कैबिनेट में इसके अलावा झिरमिटी मध्यम सिंचाई, बारना वृहद सिंचाई परियोजना, कयामपुर सीतामऊ दाब युक्त सूक्ष्म वृहद सिंचाई योजना, चितरंगी सूक्ष्म सिंचाई योजना पर भी चर्चा की गई। इसके अलावा आयुष विभाग में लोक वित्त से पोषित आयुष चिकित्सालयों और महाविद्यालयों के लिए अंब्रेला स्कीम को निरंतर जारी रखने और राष्ट्रीय आयुष मिशन को निरंतर जारी रखने पर भी चर्चा की गई। शासकीय स्कूल छात्रावास पुस्तकालय आवासीय खेलकूद भवन निर्माण विस्तार योजना को भी निरंतर रखने पर चर्चा की गई।

