प्रदेश की नई सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था: सुरक्षित और जवाबदेह परिवहन की ओर बड़ा कदम
नीलिमा तिवारी
(गजानंद फीचर सर्विस)
मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजरने जा रही है। वर्षों से बसों और अन्य लोक सेवा वाहनों के संचालन को लेकर यात्रियों की सुरक्षा, किराये की मनमानी, अमानक बॉडी निर्माण, अवैध मोडीफिकेशन और एंबूलेंस के दुरुपयोग जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। इन सभी समस्याओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार और परिवहन विभाग ने प्रदेश में एक नई, समग्र और मानकीकृत सार्वजनिक परिवहन नीति लागू करने का निर्णय लिया है। अप्रैल से शुरू होने वाली इस नई व्यवस्था के तहत प्रदेश की सड़कों पर अब वही बसें और वाहन दौड़ सकेंगे, जिनकी बॉडी भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स (एआईएस) के अनुरूप तैयार की गई हो।
मानकीकृत बॉडी निर्माण से बढ़ेगी यात्रियों की सुरक्षा
अब तक प्रदेश में यह आम शिकायत रही है कि बस मालिक और वाहन स्वामी अपनी सुविधा और लागत कम करने के लिए वाहनों में मनमाने तरीके से मोडीफिकेशन करवा लेते थे। कई बार बसों की बॉडी अमानक सामग्री से तैयार की जाती थी, जिसमें घटिया और ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल होता था। हादसों के दौरान यही सामग्री आग लगने और जनहानि का बड़ा कारण बनती थी। नई व्यवस्था में इस पर पूरी तरह रोक लगाई जा रही है।
अब प्रत्येक लोक सेवा वाहन की बॉडी केवल बीआईएस और एआईएस मानकों के अनुसार ही बनाई जा सकेगी। इसका सीधा लाभ यात्रियों को मिलेगा, क्योंकि इन मानकों के तहत मजबूत ढांचा, अग्निरोधक सामग्री, सुरक्षित सीटिंग अरेंजमेंट और आपातकालीन निकास जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य होती हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं के दौरान यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
मंजिली और ठेका वाहनों पर भी सख्त निगरानी
नई परिवहन नीति केवल सामान्य बसों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मंजिली गाड़ियां, ठेका वाहन और चार्टर्ड बसें भी शामिल हैं। इन सभी वाहनों के संचालन की निगरानी और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार आवश्यक उपकरण और उपस्कर वाहन में लगवाना अनिवार्य होगा।
परिवहन विभाग मार्ग और वाहन की प्रकृति के अनुसार विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा। राज्य परिवहन उपक्रम के अधिकारी इन वाहनों का नियमित निरीक्षण और परीक्षण करेंगे। पंजीकृत बस मालिकों के लिए इन निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। इससे न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि परिवहन व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता भी आएगी।
एंबूलेंस की जीआईएस और जीपीएस मैपिंग
प्रदेश की नई सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव भी शामिल है। प्रदेश में चलने वाली सभी शासकीय, अर्द्धशासकीय और गैर-सरकारी एंबूलेंस को जीपीएस से सुसज्जित किया जाएगा। इन एंबूलेंसों को टोल फ्री नंबर 112 या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य नंबर से वास्तविक समय में जोड़ा जाएगा।
इस व्यवस्था के लागू होने से एंबूलेंस की लोकेशन पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। इससे जरूरतमंद मरीजों तक समय पर एंबूलेंस पहुंचाना संभव होगा और एंबूलेंस के नाम पर चलने वाली अवैध गतिविधियों पर भी रोक लगेगी। जीआईएस मैपिंग से यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि एंबूलेंस का उपयोग केवल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ही हो।
नए सिरे से तय होंगे बस मार्ग
प्रदेश में सार्वजनिक बसों के संचालन के लिए मार्गों का निर्धारण भी अब नए सिरे से किया जाएगा। प्रादेशिक परिवहन अधिकारी के प्रस्ताव पर परिवहन विभाग बस मार्ग तय करेगा। इसके लिए संबंधित सड़कों के निर्माण और संधारण से जुड़े शासकीय अभिकरणों से प्रमाणपत्र लिया जाएगा।
मार्ग निर्धारण के दौरान सड़क की स्थिति, पुल-पुलिया, मौसम के अनुसार वाहन संचालन की संभावनाएं, दुर्घटना संभावित क्षेत्र, ग्रामों और कस्बों की आपसी दूरी जैसे बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बसें केवल उन्हीं मार्गों पर चलें, जो यात्री परिवहन के लिए सुरक्षित और उपयुक्त हों।
अनुज्ञा पत्र राज्य परिवहन के नाम
नई व्यवस्था के तहत सार्वजनिक वाहनों के संचालन का दायित्व सीधे राज्य परिवहन उपक्रम के पास होगा। ऐसे में अब आवेदक के रूप में राज्य परिवहन उपक्रम का नाम होगा और वाहन का विस्तृत विवरण आवेदन में देना अनिवार्य नहीं रहेगा।
राज्य परिवहन के स्वामित्व वाले वाहन का पंजीकरण चिन्ह दर्ज किए जाने के बाद अनुज्ञा पत्र जारी किया जाएगा। सीटिंग क्षमता भी स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है—डीलक्स बस में चालक सहित न्यूनतम 36 सीटें, वातानुकूलित बस में चालक सहित 36 सीटें, एक्सप्रेस बस में चालक सहित 46 सीटें और साधारण बस में चालक सहित कम से कम 51 सीटें होंगी। इससे यात्रियों को पर्याप्त और मानकीकृत सुविधाएं मिल सकेंगी।
बसों में व्यापारिक माल और पार्सल की अनुमति
नई नीति के तहत यात्री बसों में अब यात्रियों के निजी सामान के अलावा सीमित मात्रा में व्यापारिक माल और पार्सल ले जाने की भी अनुमति दी गई है। हालांकि इसके लिए स्पष्ट शर्तें तय की गई हैं।
व्यापारिक माल और पार्सल का भार वाहन के कुल भार के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा और पंजीकरण प्रमाणपत्र में निर्धारित भार सीमा का उल्लंघन नहीं किया जा सकेगा। किसी भी प्रकार की विस्फोटक सामग्री का परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। ई-वे बिल या अन्य आवश्यक दस्तावेजों के अधीन ही माल परिवहन की अनुमति होगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर माल को उतारा जाएगा और संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत व्यवस्था
यात्रियों की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए परिवहन विभाग एक ऑनलाइन पोर्टल भी विकसित करेगा। इस पोर्टल पर सार्वजनिक बसों से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जा सकेंगी।
शिकायतों का पंजीकरण, निगरानी और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर दोषी वाहन संचालकों पर जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। इससे यात्रियों को अपनी बात रखने का सशक्त मंच मिलेगा और सेवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
ग्रामीण, नगरीय और उपनगरीय मार्गों का वर्गीकरण
प्रदेश की नई सार्वजनिक परिवहन नीति में मार्गों का स्पष्ट वर्गीकरण भी किया गया है।
जो मार्ग किसी गांव को अन्य गांव से जोड़ते हैं या किसी ग्राम को तहसील मुख्यालय, नगर पालिका, नगर पंचायत या नगर निगम क्षेत्र से जोड़ते हैं, उन्हें ग्रामीण मार्ग माना जाएगा।
नगर पालिका निगम की सीमा के भीतर आने वाले मार्ग नगरीय मार्ग कहलाएंगे। वहीं, जो नगरीय मार्ग उपनगरीय क्षेत्रों तक विस्तारित होंगे और जिनमें कम से कम पांच स्टॉपेज नगरीय क्षेत्र में होंगे, उन्हें उपनगरीय मार्ग के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। इस वर्गीकरण से परिवहन योजना अधिक व्यवस्थित और जरूरत आधारित बन सकेगी।
किराया और मालभाड़ा सरकार करेगी तय
अब बसों और मालवाहक वाहनों के किराये और मालभाड़े को लेकर मनमानी की गुंजाइश नहीं रहेगी। राज्य सरकार स्वयं किराया और मालभाड़ा तय करेगी। इसके साथ ही रियायती योजनाएं भी सरकार द्वारा ही निर्धारित की जाएंगी।
इससे यात्रियों को पारदर्शी और न्यायसंगत किराया प्रणाली का लाभ मिलेगा। छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य पात्र वर्गों के लिए रियायतें भी सुचारु रूप से लागू की जा सकेंगी।
भरोसेमंद परिवहन की दिशा में मजबूत कदम
मध्यप्रदेश की नई सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था केवल नियमों का संग्रह नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और विश्वास को केंद्र में रखकर तैयार की गई एक व्यापक योजना है। मानकीकृत बस बॉडी, एंबूलेंस की जीपीएस मैपिंग, मार्गों का वैज्ञानिक निर्धारण, किराये पर सरकारी नियंत्रण और ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था जैसे प्रावधान परिवहन प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाएंगे।
यदि इन नियमों का सख्ती से पालन किया गया और समय-समय पर समीक्षा होती रही, तो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था देश के अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है।

