भोपाल मास्टर प्लान-2047 : जमीन के इस्तेमाल में बड़ा बदलाव, 27 फीसदी क्षेत्र हरियाली के लिए; झीलों, जलाशयों और जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण पर जोर
भोपाल मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट जारी: जमीन के इस्तेमाल में बड़ा बदलाव, 27 फीसदी क्षेत्र हरियाली के लिए; झीलों, जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण पर जोर
भोपाल। राजधानी भोपाल के वर्ष 2047 तक के विकास का खाका तैयार करने वाले मास्टर प्लान में जमीन के उपयोग को लेकर व्यापक धाराओं का प्रस्ताव किया गया है। करीब 1016.90 वर्ग किलोमीटर के निर्धारित क्षेत्र और अनुमानित 45 लाख आबादी को ध्यान में रखकर तैयार प्रारूप में पिछड़े, व्यावसायिक, औद्योगिक, मिश्रित उपयोग, परिवहन और हरित क्षेत्र के लिए अलग-अलग भूमि उपयोग तय किया गया है। खास बात यह है कि विकास के लिए जमीन के बढ़ते उपयोग के साथ प्राकृतिक आधार, एनएच भोजताल, उसके जलग्रहण क्षेत्र, तालाबों, जलग्रहणों, पहाड़ियों और वन क्षेत्रों के संरक्षण को भी योजना के केंद्र में रखा गया है।
प्रस्तावित योजना में कुल 61,017.02 हेक्टेयर क्षेत्र का भूमि उपयोग निर्धारित किया गया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए है, जबकि इसके बाद करीब 27 प्रतिशत भूमि हरित क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित की गई है। इस तरह भविष्य के भोपाल में एक तरफ नए आवासीय क्षेत्रों के विस्तार की गुंजाइश रखी गई है, तो दूसरी तरफ शहर की पर्यावरणीय पहचान को बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में जमीन हरियाली और खुले क्षेत्रों के लिए सुरक्षित रखने की कोशिश की गई है।
43.85 प्रतिशत भूमि आवासीय उपयोग के लिए
मास्टर प्लान में प्रस्तावित भूमि उपयोग में 26,755.50 हेक्टेयर यानी 43.85 प्रतिशत क्षेत्र आवासीय रखा गया है। 45 लाख की गेल आबादी के लिए आवासीय विस्तार की जरूरत को देखते हुए इस योजना का सबसे बड़ा भूमि उपयोग वर्ग है। इसका अर्थ है कि आने वाले वर्षों में भोपाल के विकास में आवासीय क्षेत्रों का विस्तार प्रमुख भूमिका निभाएगा।
लेकिन योजना केवल नए पिछड़े क्षेत्र विकसित करने तक सीमित नहीं है। पहले से विकसित शहर में जमीन के बेहतर इस्तेमाल के लिए री-डेवलपमेंट को भी प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। परियोजनाओं के संयोजन और बेस एफ रोड में छूट जैसे प्रावधानों के माध्यम से पुराने और विकसित क्षेत्रों में पुनर्विकास को बढ़ावा देने की योजना है। इसके अलावा 70 प्रतिशत रहवासियों की सहमति होने पर आर के माध्यम से पिछड़े अपार्टमेंट के पुनर्विकास का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
इससे शहर के मौजूदा हिस्सों में उपलब्ध जमीन का ज़्यादा असरदार इस्तेमाल किया जा सकता है। और नए इलाकों में अ सीमित विस्तार का दबाव कम करने की दिशा में काम हो सकता है।
मिश्रित उपयोग से घर और काम करीब होंगे
मास्टर प्लान में जमीन के इस्तेमाल को ज्यादा पक्षपात बनाने के लिए मिश्रित भूमि इस्तेमाल की अवधारणा को भी महत्व दिया गया है। कुल 2,448.84 हेक्टेयर यानी 4.01 प्रतिशत भूमि मिश्रित इस्तेमाल के लिए प्रस्तावित है। सड़क की चौड़ाई के आधार पर पिछड़े इलाकों में मिश्रित इस्तेमाल की इजाज़त देने का प्रावधान है। इसका मकसद घर और ज़मीन के बीच बेहतर तालमेल बनाना और शहर की मोबिलिटी को पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन पर आधारित बनाना है।
इस व्यवस्था के तहत ऐसे क्षेत्र विकसित करने की परिकल्पना है जहां आवास के साथ कुछ व्यावसायिक और अन्य अनुमत गतिविधियां भी हो सकें। इससे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता कम करने की दिशा में मदद मिल सकती है।
व्यावसायिक भूमि करीब 1,349 हेक्टेयर
भोपाल के भविष्य के आर्थिक विस्तार के लिए 1,348.97 हेक्टेयर यानी 2.21 प्रतिशत भूमि व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रस्तावित है। इसके साथ 2,137.25 हेक्टेयर यानी 3.50 प्रतिशत औद्योगिक, 771.44 हेक्टेयर यानी 1.26 प्रतिशत लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग और 5793.82 हेक्टेयर यानी 9.53 प्रतिशत परिवहन उपयोग के लिए रखा गया है।
आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए करीब 3,000 हेक्टेयर भूमि विकास कॉरिडोर में प्रस्तावित की गई है। करीब 51 किलोमीटर लंबे विकास कॉरिडोर को शहर के भविष्य के आर्थिक विस्तार की महत्वपूर्ण धुरी के रूप में विकसित करने की परिकल्पना है। यह क्षेत्र शिक्षा-नॉलेज-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी ईके हटाना शहर, हवाई अड्डा, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक्स और थोक व्यापार क्षेत्रों तथा विभिन्न उपनगरों से जुड़ने वाला होगा।
विकासशील कॉरिडोर में होटल, हॉस्पिटैलिटी, स्वास्थ्य सेवाएं, व्यापार, आईटी, संरेखण और डाटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, थोक व्यापार, हाइपर मार्केट, मॉल, विकासशील कार्यालय, शिक्षा हब और आवास जैसी रोजगार आधारित गतिविधियों को मिश्रित उपयोग के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है।
हरित क्षेत्र 16 से बढ़कर 27 प्रतिशत
मास्टर प्लान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू हरित क्षेत्र में वृद्धि का प्रस्ताव है। वर्ष 2005 की विकास योजना में हरित क्षेत्र लगभग 16 प्रतिशत था, जिसे 2047 के प्रारूप में बढ़ाकर करीब 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है। कुल भूमि उपयोग में हरित क्षेत्र के लिए 16,489.94 हेक्टेयर जमीन रखी गई है।
कॉलोनी स्तर पर भी खुले क्षेत्र का हिस्सा बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसे 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने की बात कही गई है। इसके अतिरिक्त सर्विस एरिया के लिए 2 प्रतिशत क्षेत्र रखना आवश्यक होगा। इसका उद्देश्य केवल बड़े हरित क्षेत्रों का निर्माण नहीं, बल्कि स्वतंत्र विकास के भीतर भी खुले और हरित क्षेत्रों की उपलब्धता बढ़ाना है।
भानपुर खंती के पुनर्विकास के लिए गोल्फ कोर्स का प्रस्ताव भी इसी व्यापक भूमि उपयोग योजना का हिस्सा है।
झीलें, तालाब और जलग्रहण क्षेत्र होंगे योजना के केंद्र में
भोपाल की पहचान झीलों के शहर के रूप में है। इसलिए मास्टर प्लान में भूमि विकास के साथ जल संसाधन और प्राकृतिक नदियों के संरक्षण को प्रमुख आधार बनाया गया है। योजना में भोजताल और उसके जलग्रहण क्षेत्र को संरक्षित रखने की अवधारणा को आधार माना गया है। इसके साथ पहाड़ियों, वन क्षेत्रों, तालाबों और जलग्रहणों तथा वन विहार क्षेत्र के संरक्षण के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।
यह प्रावधान इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि भविष्य में शहर के निकायों और व्यावसायिक विस्तार के बीच जल निकायों और प्राकृतिक क्षेत्रों की भूमिका बनी रही। योजना के चार आधार स्तंभों में भी प्राकृतिक नदियों के संरक्षण तंत्र का स्पष्ट रूप से समावेश है।
यानी मास्टर प्लान में जमीन को केवल निर्माण के संसाधन के तौर पर नहीं देखा गया है, बल्कि झील, जलग्रहण क्षेत्र, हरित क्षेत्र और प्राकृतिक भू-दृश्य को भी शहर की नियोजन व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।
चौड़ी सड़क के चारों ओर ज्यादा निर्माण की गुंजाइश
भूमि के बेहतर उपयोग के लिए एफ रोड और भवन की ऊंचाई से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव का प्रस्ताव है। सड़क की चौड़ाई के आधार पर एफ रोड तय किया जाएगा। अधिक चौड़ी सड़कों पर कुछ परियोजनाओं को एफ रोड और भवन की ऊंचाई की सीमा से मुक्त रखने का प्रस्ताव प्रस्तावित है।
विकास खनिजों को सरल बनाने के लिए ग्राउंड कवरेज हटाने और घेराबंदी के आसपास छिन्न-भिन्न जाने वाले एमओएस के पुनर्निर्धारण का भी प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग करना और नागरिकों तथा विकास खनिजों के लिए नियमों को समायोजित करना आसान है।
बढ़ते कॉरिडोर में आवास से लेकर आमदनी तक
51 किलोमीटर लंबे बढ़ते कॉरिडोर में जमीन का उपयोग केवल व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होगा। यहां आवास, होटल, स्वास्थ्य सेवाएं, आईटी, आधुनिकीकरण, डाटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, थोक व्यापार, जरूरतमंद और शिक्षा जैसी गतिविधियों को मिश्रित रूप में विकसित करने की परिकल्पना है।
कॉरिडोर को विभिन्न रेडियल ग्रोथ से जोड़ते हुए ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी TOD के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। सार्वजनिक परिवहन के लिए बीआरटीएस कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है, जिसे भविष्य में एमआरटीएस में अपग्रेड किया जा छेव।
इससे पिछड़े और व्यावसायिक क्षेत्रों को सार्वजनिक परिवहन के साथ मंदी विकसित करने की दिशा दिखाई देती है।
किफायती और किराए के आवास को भी जगह
मास्टर प्लान में जरूरतमंद परियोजनाओं के साथ किफायती आवास पर भी ध्यान दिया गया है। ऐसी परियोजनाओं को एफ रोड तय करने की बाध्यता से मुक्त रखने का प्रस्ताव है। इसके अलावा शहर में रहने वाले नागरिकों के लिए रेंटल हाउसिंग विकसित करने को प्रोत्साहन देने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
इससे आवासीय भूमि उपयोग में केवल बड़े निजी आवासीय प्रोजेक्ट ही नहीं, बल्कि किफायती और हाय के आवास को भी स्थान देने का उद्देश्य दिखाई देता है।
कुल तस्वीर : निर्माण भी, संरक्षण भी
भोपाल विकास योजना-2047 के भूमि उपयोग का पूरा स्वरूप देखें तो 43.85 प्रतिशत भूमि निर्बाध, 27.01 प्रतिशत हरित, 9.53 प्रतिशत परिवहन, 8.01 प्रतिशत सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक, 3.50 प्रतिशत औद्योगिक, 4.01 प्रतिशत मिश्रित, 2.21 प्रतिशत व्यावसायिक और 1.26 प्रतिशत लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग के लिए प्रस्तावित है।
इसमें सबसे बड़ा संदेश यह है कि आने वाले भोपाल में जमीन का इस्तेमाल केवल मकानों और सिरों के विस्तार के लिए नहीं होगा। आवासीय क्षेत्रों के लिए सबसे अधिक जमीन रखते हुए भी हरित क्षेत्र को करीब 27 प्रतिशत तक ले जाने, कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्र बढ़ाने और भोजताल, जलग्रहण क्षेत्रों, तालाबों, विलयों,<extra_id_1> तथा वन क्षेत्रों के संरक्षण को योजना में स्थान दिया गया है।
वहीं दूसरी ओर व्यावसायिक, औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों के लिए अलग-अलग भूमि उपयोग निर्धारित कर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की जमीन तैयार की गई है। विकास कॉरिडोर इस आर्थिक विस्तार को आवास, शिक्षा, आधुनिकीकरण, आईटी और सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
इस प्रकार मास्टर प्लान-2047 में भोपाल के लिए जमीन का नया संतुलन प्रस्तावित किया गया है—रहने के लिए ज्यादा जमीन, आर्थिक गतिविधियों के लिए नियोजित क्षेत्र और शहर की पहचान बचाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में हरियाली और प्राकृतिक जल संसाधनों का संरक्षण। यही संतुलन आने वाले भोपाल के शहरी विस्तार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता के रूप में सामने आता है।

