प्रदेश के सभी कोचिंग सेंटरों का 90 दिन में होगा पंजीयन, फीस,टीचर, सुरक्षा की जानकारी वेबसाईट पर जरुरी

कोचिंग सेंटरों पर लगेंगी शिकायत पेटियां, हर शाखा का होगा अलग पंजीयन

 

भोपाल। मध्यप्रदेश के सभी जिलों में संचालित कोचिंग सेंटरों को अब 90 दिन के भीतर अपने कोचिंग सेंटरों का पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। उन्हें वेबसाईट बनाकर उस प यह जानकारी भी देना होगा कि यहां पढ़ाने पर बच्चों की कितनी फीस लगेगी। वहां पढ़ाने वाले कितने शिक्षकों का शैक्षणिक स्तर क्या है यिह भी बताना होगा और पच्चों के लिए पर्याप्त अधोसंरचना, बैठने की व्यवस्था, सभी अपेक्षित सुविधाओं वाले प्रशाधन कक्ष, स्वच्छ पेयजल और अग्निशमन सुरक्षा सहित व्यापक सुरक्षा इंतजाम भी करना होगा । सीसीटीवी कैमरे भी लगाने होंगे और शिकायत पेटियां भी लगानी होगी।

उच्च शिक्षा विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुपालन में मध्यप्रदेश में संचालित सभी कोचिंग सेंटरों का 90 दिन में पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया है।कोचिंग केन्द्रों के पंजीयन और विनियमन, विद्यार्थियों की सुरक्षा और कल्याण तथा मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करने और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध कराने के लिए नियम बनाकर लागू कर दिए है।

हर शाखा के लिए अलग पंजीयन अनिवार्य, तीन साल तक वैध-

शहर के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग शाखाओं में कोंचिंग सेंटर चलाने वाले संचालकों को हर शाखा का अलग से पंजीयन कराना होगा। नियम लागू होंने के 90 दिन के अंदर पंजीयन के लिए आवेदन करना है। पंजीयन तीन वर्ष के लिए विधिमान्य होगाञ। हर तीन साल में नवीनीकरण कराना होगा। कोचिंग सेंटर संचालकों को नगर निगम आयुक्त, नगर पालिका तथा नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी और जनपद पंचायतों में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पास पंजीयन कराना होगा। पंजीयन पोर्टल पर आॅनलाईन कराया जा सकेगा। प्रमाणपत्र में प्रदर्शित परिसर में ही कोचिंग संचालित की जा सकेगी।

अनियमितताएं मिली तो पंजीयन निरस्त–

पंजीयन अधिकारी इन केन्द्रों का निरीक्षण कर सकेगा और केन्द्र द्वारा पंजीयन के लिए गलत, मिथ्या या भ्रामक जानकारी देने और अनियमितता मिलने पर अथवा जिला निगरानी समिति की सिफारिश पर आदेश बताते हुए कोचिंग केन्द्र के पंजीयन को निलंबित या निरस्त कर सकेगा। कमियां दूर करने पर पुन: केन्द्र का संचालन शुरु हो सकेगा।

वेबसाईट पर होगी फीस, टयूटर और सुरक्षा की जानकारी-

हर कोचिंग केन्द्र की एक वेबसाईट होगी जिस पर विद्याथर््िायों से ली जाने वाली फीस की संरचना, निकास नीति और शुल्क प्रतिदाय नीति, वहां काम कर रहे टयूटर की संख्या, नाम, योग्यता और सहायक कर्मचारियों की संख्या औश्र नाम बताना होगा। जिन परीक्षाओं के लिए कोचिंग दी जा रही है उनमें विद्यार्थियों को दी जाने वाली अकादमिक सायता का प्रकार भी बताना होगा। मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता नियुक्त कर उसका नाम, संपर्क और योग्यता का उल्लेख करना होगा। हर कार्यक्रम के लिए सूची जिसमें पिछले पांच वर्ष के सफल विद्यार्थियों और कुल नामांकित विद्यार्थियों का वर्षवार विवरण भी देना होगा। सुरक्षा उपाय, सुविधाएं, खुलने और बंद होंने का समय, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े हेल्पलाईन नंबर, नियमों की प्रति, शिकायत निवारण तंत्र और विद्यार्थी संरक्षण मानदंडों का पालन करने की जानकारी देना होगा। संपर्क के विवरण भी देना होगा।

स्नातक ही पढ़ा पाएंगे, आपराधिक छवि वाले नहीं होंगे तैनात-

टयूटर के रुप में स्नातक उपाधि न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता रहेगी। अपराधों के लिए दोष सिद्ध व्यक्ति को टयूटर और सहायक कर्मचारी के रुप में तैनात नहीं किया जा सकेगा। टयूट और सहायक कर्मचाी की सूची पूरे विवरण के साथ समीपस्थ थाने में देना होगा।

चौबीस घंटै सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरे जरुरी-

कर केन्द्र पर कार्यसमय में प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मचारी तैनात करना होगा।आवासीय परिसर में चौबीस घंटे सुरक्षा सुरििश्चत करना होगा। मानसिक स्वास्थ्य नीति के अनुसार परामर्शदाता भी नियुक्त करना होगा। सेंटर में सीसीटीवी कैमरे से सुरक्षा करना होगा। बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, शौचालय,टैम्पर प्रूफ सीलिंग पंखे,अग्निशमन उपकरण और प्राथमिक उपचार पेटियां लगाना होगा।

छत बालकनी पर पहुंच प्रतिबंधित, शिकायत पेटियां लगानी होगी-

परिसर में आत्म हानि के आवेगपूर्ण कृत्य को रोकने, छत बालकनी और जोखिम वाले क्षेत्रों तक पहुंच प्रतिबंधित करना होगा। आंगतुक पंजी रखनी होगी और परिसर सुरक्षा प्रोटोकाल का पालन कना होगा। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अलग इंतजाम करने होंगे। धर्म जाति के आधार पर विभेद नहीं किया जा सकेगा। शिकायत पेटी भी लगाना होगी जो लगातार खोली जाएंगी।

हेल्पलाईन नंबर सार्वजनिक करने होंगे-

टेलीमानस, उमंग और चाइल्ड हेल्पलाईन नंबर की जानकारी केन्द्र की वेबसाईट तथा सूचना पटल प लगाना होगा। यदि कोई आत्महत्या की घटना होगी तो चौबीस घंटे में जिला निगरानी समिति को बताना होगा। सीसीटीवी कैमरे वस्त्र बदलने के कक्ष, परामर्श कक्ष और शौचालय मे नहीं लगाए जाएंगे।

परामर्श और शिकायत निवारण तंत्र–

सुझाव, शिकायत पेटियां लगाई और खेली जाएंगी। जिला स्तर पर निगरानी समिति निवारण प्रकोष्ठ स्थापित करेगी। पालकों के साथ तय समय पर बैठकें और फीडबैक देना अनिवार्य होगा।