मध्यप्रदेश में समान नागरिकता संहिता लागू करने यूसीसी सहित नौ विधेयकों के मसौदे को कैबिनेट को मंजूरी
-ई बसों में सवार होकर जगदीशपुर पहुंचे सीएम, मंत्री, सी एस और अफसर,
73 स्वास्थ्य्य संस्थाओं के उन्नयन को भी हरी झंडी
भोपाल।
मध्यप्रदेश में अब सभी धर्मावलंबियों के लिए समाना नागरिक संहिता होगी। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने के लिए समान अधिकार होंगे पैतृक सम्पति में महिला और पुरुषों को समान अधिकार होंगे। लिव इन में रहने वालों के लिए पंजीयन जरुरी होगा इसके लिए मंत्रिमंडल ने सोमवार से शुरु हो रहे विधानसभा सत्र में पेश करने के लिए समान नागरिक संहिता यूसीसी विधेयक 2026 सहित नौ प्रमुख विधेयकों को मंजूरी दे दी। वहीं प्रदेश की 73 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट में चर्चा की गई।
हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई सभी धर्मावलंबियों के लिए मध्यप्रदेश में एक समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए विधानसभा में लाए जा रहे यूसीसी विधेयक को मंजूरी देने के लिए राज्य सरकार ने इस बार राजधानी भोपाल के समीप जगदीशपुर में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया था। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, सभी मंत्री ,मुख्य सचिव अनुराग जैन और विभागों के सारे अधिकारी कैबिनेट में शामिल होंने के लिए ई बसों पर सवार होकर जगदीशपुर पहुंचे। कैबिनेट में विधि विभाग द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता 2026 (यूसीसी विधेयक) के प्रारुप विधेयक का अनुमोदन किया गया। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक 2026 के प्रारुप का अनुमोदन करते हुए विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत करने की स्वीकृति दी गई। अग्निशमन अधिनियम से पंद्रह मीटर से ऊंची बहुमंजिला इमारतों, स्कूल जहां पांच सौ से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ते है और पंद्रह से अधिक कमरों वाले होटल, मॉल, पचास से अधिक बिस्तरों वाले अस्पताल, व्यावसायिक परिसरों में फायर एनओसी अनिवार्य होगी। ऐसा नहीं करने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। नगरीय निकायों में प्रापर्टी टैक्स के साथ फायर सेफ्टी टैक्स भी लगाने का प्रस्ताव है।
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन)संशोधन विधेयक 2026 जिसके जरिए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना हेतु भूमि, निर्मित क्षेत्र तथा विन्यास निधि के प्रावधान से छूट दी जाएगी इसका भी अनुमोदन किया गया। इसके तहत प्रदेश में विश्वविद्यालय शुरु करने के लिए पच्चीस एकड़ जमीन की पाबंदी समाप्त की जाएगी। मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में भी विश्वविद्यालय शुरु किए जा सकेंगे। ाम विभाग की ओर से प्रस्तुत मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता 2026( मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण विधेयक 2026) के प्रारुप का अनुमोदन भी कैबिनेट में किया गया । श्रम विभाग की ओर से लाए गए मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता विधेयक के अंतर्गत पुराने श्रम कानूनों समाप्त कर केन्द्रीय श्रम कोड के अनुमूल एकीकृत कानून लागू किया जाएगा। थियेटर और रेस्टोरेंट में चौबीस घंटे सातों दिन संचालन के लिए तीन शिफ्टों में काम कराने का प्रावधान किया जाएगा। नये प्रतिष्ठान की स्थापना पर आवेदन पर इंस्पेक्टर के वेरिफिकेशन खत्म किया जाएगा।औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग की ओर से ई आॅफ डूइंग बिजनेस ईओडीबी से जुड़े विधेयक के प्रारुप का भी अनुमोदन किया गया। इसमें मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवपलमेंट कारपोरेशन में एक ईज आॅफ डुइंग बिजनेस सचिवालय खुलेगा, जहां नई इंडस्ट्री की सभ्ज्ञी स्वीकृतियां सिंगल विंडो मे मिलेगी। सभी विभाग अपने अधिकारों को ट्रांसफर करेंगे। जो विभाग ऐसा नहीं करेगा उसके अधिकारी की पदस्थापना ईओडीबी सचिवालय मे की जाएगी। निवेशक खुद हलफनामा देंगे कि वे उद्योग लगाने जा रहे है इसी आधार पर लेटर ऑफ स्टेब्लिशमेंट जारी हो जाएगा। पीसीबी प्रमाणपत्र भी जरुरी नहीं होगा। इसके अलावा विधि विभाग के द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश निरसन विधेयक 2026 , लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026 का भी अनुमोदन किया गया। इसके जरिए प्रदेशभर में स्टेट हाइवे पर अवैध कट और अतिक्रमण रोकने के लिए कड़े प्रावधान किए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रस्तुत मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 पर भी चर्चा की गई इसमें जबलपुर में एक विवि को दो भागों मेें बांटा जाएगा और मध्यप्रदेश धनवंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 का अनुमोदन भी कैबिनेट ने किया।
प्रदेश की 73 स्वास्थ्य संस्थाओं का उन्नयन-
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से पेश प्रस्ताव में प्रदेश की 73 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन के प्रस्ताव को भी चर्चा के बाद मंजूरी दी गई।
विधानसभा के लिए छह विधेयकों को पहले मिल चुकी मंजूरी-
विधानसभा में पेश किए जाने के लिए छह विधेयकों को कैबिनेट से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। इसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता मध्यप्रदेश संशोधन विधेयक 2026 का अनुमोदन कैबिनेट से हो चुका है। इसके तहत बीएनएसएस के अनुरुप न्यायिक और पुलिस जांच प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जाएगा। प्रथम अनुपूरक अनुमान वित्तीय वर्ष 2026-27 का विधानसभा में उपस्थापन करने विनियोग विधेयक, मध्यप्रदेश उपकर संशोधन विधेयक2026 भी कैबिनेट से स्वीकृत हो चुका है। विभिन्न विकास परियोजनाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के लिए उपकर के रुप में रुप में फंड जमा किया जाता है। लेकिन स्वामित्व योजना के अंतर्गत आबादी के अधिकार पत्रों की रजिस्ट्री में सम्पत्ति के मूल्य के आधा प्रतिशत की दर से लगने वाले कर से छूट प्रदान की जाएगी। मध्यप्रदेश वेट संशोधन विधेयक 2026, मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज संशोधन निधेयक 2026 को स्वीकृति मिल चुकी है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पत्ति की खरीदी और बिक्री पर रजिस्ट्री पर एक प्रतिशत जनपद उपकर लगता है। स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी के अधिकार पत्रों की रजिस्ट्री अब निशुल्क होगी।भी विधानसभा में पेश किए जाएंगे।

