श्रमोदय स्कूल में 13 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, खाने में छिपकली मिलने का दावा
भोपाल के मुगालिया छाप-नीलबड़ स्थित आवासीय विद्यालय का मामला; 11 बच्चे जेपी अस्पताल में भर्ती, सभी की हालत सामान्य
कैंटीन संचालक को नोटिस, पुलिस जांच में जुटी
भोपाल। राजधानी भोपाल के मुगालिया छाप-नीलबड़ स्थित शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार रात, 10 अक्टूबर को छात्रावास में खाना खाने के बाद 13 विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चों ने आरोप लगाया कि उन्हें परोसी गई आलू की सब्जी में छिपकली मिली थी। उल्टी और पेट दर्द की शिकायत के बाद विद्यार्थियों को उपचार के लिए जयप्रकाश (जेपी) अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें से 11 बच्चों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की जानकारी सामने आई है। चिकित्सकों के मुताबिक, सभी बच्चों की हालत फिलहाल सामान्य है। घटना के बाद विद्यालय प्रबंधन ने कैंटीन संचालक को नोटिस जारी किया है, जबकि रातीबड़ थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
भोजन के बाद बिगड़ी बच्चों की तबीयत
जानकारी के अनुसार, शनिवार रात छात्रावास में विद्यार्थियों को नियमित भोजन परोसा जा रहा था। इसी दौरान आलू की सब्जी में छिपकली मिलने की शिकायत सामने आई। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों को उल्टी और पेट दर्द की परेशानी होने लगी। स्थिति को देखते हुए बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार शुरू किया गया।
बीमार विद्यार्थियों में छठवीं से नौवीं कक्षा तक के छात्र शामिल बताए गए हैं। घटना के बाद छात्रावास में भोजन तैयार करने, उसकी गुणवत्ता की जांच करने और विद्यार्थियों को खाना परोसने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
खाने में छिपकली मिलने का दावा, पुष्टि का इंतजार
विद्यार्थियों ने दावा किया कि आलू की सब्जी में छिपकली मिली थी। घटना से संबंधित एक वीडियो सामने आने की भी खबर है, जिसमें भोजन की कढ़ाई में छिपकली जैसी वस्तु दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक भोजन में छिपकली मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
बच्चों की तबीयत बिगड़ने का वास्तविक कारण क्या था, यह जांच और चिकित्सकीय परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। भोजन के नमूनों की जांच और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों का सत्यापन इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।
कैंटीन संचालक को नोटिस
घटना के बाद विद्यालय की प्राचार्य रत्ना दुबे ने कैंटीन संचालक को नोटिस जारी किया है। समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, प्राचार्य ने बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी भी ली। मामले में लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में किसी की जिम्मेदारी अंतिम रूप से साबित नहीं करता। भोजन की तैयारी, उसकी गुणवत्ता की निगरानी और वितरण के दौरान हुई संभावित चूक की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
परिजनों ने सूचना देने में देरी पर उठाए सवाल
घटना के बाद कुछ विद्यार्थियों के परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी उन्हें विद्यालय प्रबंधन की ओर से समय पर नहीं दी गई। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ परिजनों को घटना की जानकारी स्कूल के समूह के माध्यम से मिली, जिसके बाद वे अस्पताल पहुंचे।
आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विद्यालय प्रबंधन पर भरोसा करते हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में अभिभावकों को समय पर सूचना देना और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
रातीबड़ थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, शनिवार रात विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ने और उन्हें अस्पताल पहुंचाए जाने की सूचना मिली थी। मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
बड़े आवासीय परिसर में भोजन की निगरानी अहम
श्रमोदय आवासीय विद्यालय में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहते और पढ़ते हैं। ऐसे परिसर में प्रतिदिन भोजन तैयार करने और वितरित करने की जिम्मेदारी भी बड़ी होती है। रसोई की स्वच्छता, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, भोजन तैयार करने के दौरान निगरानी और परोसने से पहले उसकी जांच जैसे उपाय विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि क्या आवासीय विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता जांचने और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने की व्यवस्था पर्याप्त है। अब जांच के निष्कर्षों, भोजन की गुणवत्ता से जुड़े परीक्षणों और विद्यालय प्रबंधन की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

