डिप्टी CM जगदीश देवड़ा के OSD रहे दीपम रायचूरा निलंबित, फर्जी FDR समेत 7 गड़बड़ियां उजागर

 

शराब ठेकों में अनियमितता पर बड़ी कार्रवाई 

भोपाल। मध्यप्रदेश में वर्ष 2024-25 के शराब दुकानों के ठेकों से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। आबकारी आयुक्त, मध्यप्रदेश की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, जिला आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। रायचूरा इससे पहले उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के अतिरिक्त कार्यवाही में भी रहे हैं।

विभागीय जांच में शराब दुकानों के ठकेके मंजूर करने, बैंक की सावधि जमा वोट (एफडीआर) के सत्यापन, निर्धारित समय पर प्रतिभूति जमा कराने और फर्म की साझेदारी से संबंधित दस्तावेजों में कई अनियमितताएं सामने आने का उल्लेख है। आदेश में इन धाराओं को गंभीर अपराधी और शासकीय वित्तीय हितों की सुरक्षा से जुड़ा मामला माना गया है।

इससे पहले शराब ठेकों के बदले कथित तौर पर एक करोड़ रुपये के भुगतान के आरोप सामने आने के बाद 9 अक्टूबर को उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने रायचूरा को ओएसडी के अतिरिक्त आरोपों से मुक्त करने और मामले की जांच कराने की बात कही थी। हालांकि, रिश्वत से संबंधित आरोप और विभागीय आदेश में दर्ज अनियमितताएं अलग-अलग पहलू हैं। रिश्वत के आरोप को इस आदेश से अपने आप प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

जांच में सामने आईं सात प्रमुख अनियमितताएं

आबकारी आयुक्त कार्यालय के आदेश के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 के कार्यालयीन आदेश के तहत गठित दो आंकड़ों जांच दल ने मामले की जांच की। जांच प्रतिवेदन के आधार पर रायचूरा के खिलाफ प्रमुख रूप से निम्नलिखित अनियमितताएं दर्ज की गई।

1. फर्जी एफडीआर स्वीकार कर शराब दुकानों के ठकेके मंजूर करने का मामला

आदेश में उल्लेख है कि शराब दुकानों के ठेकों से संबंधित प्रक्रिया में लगभग 2.75 करोड़ रुपये की प्रतिभूति राशि की FDR स्वीकार की गई। यह FDR AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के नाम से प्रस्तुत की गई थी। दस्तावेज़ में दर्ज बैंक के सत्यापन संबंधी विवरण के अनुसार, संबंधित बैंक ने उक्त FDR अपने यहां से जारी होने से इनकार कर दिया।

आदेश में यह भी कहा गया है कि एफडीआर के सत्यापन से संबंधित प्रत्यावर्तन और रिकॉर्ड की जांच में अनियमितताएं बकाया हैं। विभाग ने निष्कर्ष निकाला कि पर्याप्त सत्यापन के बिना एफडीआर स्वीकार की गई और उसके आधार पर ठेका प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

2. निर्धारित श्रेणी में नहीं आने वाले बैंक की प्रतिभूति स्वीकार करना

जांच में यह भी पाया गया कि मध्यप्रदेश राजपत्र में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार प्रतिभूतियों के लिए मान्य बैंक की प्रतिभूतियों में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक शामिल नहीं था। इसके बावजूद बैंक की एफडीआर को प्रतिभूतियों के रूप में स्वीकार किए जाने को आदेश में नियमों का उल्लंघन बताया गया है।

3. सिक्योरिटी जमा करने में देरी के बावजूद कार्रवाई नहीं करना

आदेश के अनुसार, निर्धारित प्रतिभूति राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा 20 अप्रैल 2024 तक जमा किया जाना था। शेष राशि 30 अप्रैल 2024 तक जमा होनी थी। दस्तावेज में बताया गया है कि 50 प्रतिशत राशि 20 अप्रैल को कैश जमा कराई गई, जबकि संबंधित एफडीआर 12 मई 2024 को प्रस्तुत की गई।

विभागीय आदेश में एफडीआर स्वीकार करने में हुई देरी को नियमों के अनुरूप कार्रवाई नहीं किए जाने का मामला माना गया है।

4. पंजीकृत भागीदारी विलेख के बिना फर्म के स्वामित्व हस्तांतरण पर कार्रवाई

जांच में मेसर्स मां माइंस के स्वामित्व और साझेदारी में बदलाव से जुड़ी प्रक्रिया भी सवालों के घट में आई। आदेश के अनुसार, फर्म के हस्तांतरण के लिए आवेदन 10 जुलाई 2024 को प्राप्त हुआ था और कलेक्टर भोपाल ने 27 दिसंबर 2024 को हस्तांतरण आदेश जारी किया।

विभाग ने दर्ज किया कि ट्रांसफर से पहले आवश्यक रजिस्टर्ड पार्टनरशिप विलेख प्रस्तुत नहीं किया गया। उपलब्ध दस्तावेजों और आबकारी पोर्टल पर दर्ज पार्टनरशिप संबंधी जानकारी में भी पंजीकृतयां पाई गईं।

5. गैर-भागीदार व्यक्ति की बैंक गारंटी स्वीकार करना

आदेश में उल्लेख है कि मेसर्स मां माइंस के मामले में विजय सिंह की ओर से 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी स्वीकार की गई। विभागीय जांच के अनुसार, विजय सिंह न तो मूल अनुज्ञप्तिधारी थे और न ही संबंधित फर्म के वैधानिक चेहरे बताए गए।

इसके बावजूद उनकी ओर से प्रस्तुत बैंक गारंटी स्वीकार किए जाने को नियमों का उल्लंघन माना गया है।

6. गैर-भागीदार के बैंक खाते से जारी पोस्ट-डेटेड चेक स्वीकार करना

जांच में यह भी दर्ज किया गया कि संबंधित फर्म के लिए ऐसे व्यक्ति के बैंक खाते से जारी पोस्ट-डेटेड चेक स्वीकार किए गए, जिसे डिविजनल रिकॉर्ड में फर्म का चेहरा नहीं माना गया था।

आदेश के अनुसार, इससे शासकीय राजस्व की वसूली ऐसे व्यक्ति के खाते पर निर्भर हो सकती थी, जिसे फर्म के साथ वैधानिक साझेदारी स्थापित नहीं थी।

7. अपराधियों से गिरफ्तारी और दस्तावेज स्वीकार करना

विभागीय आदेश में फर्म के भागीदारों से संबंधित प्रतियां, प्रत्यावर्तन और स्थानांतरण प्रक्रिया में भी अनियमितताओं का उल्लेख है। इसमें ऐसे व्यक्तियों से प्राप्त प्रतियां और पत्रों पर कार्रवाई किए जाने का मुद्दा शामिल है, जिन्हें संबंधित फर्म का अधिकृत प्रतिनिधि नहीं माना गया।

इन सभी बिंदुओं को मिलाकर जांच दल ने प्रतिभूति स्वीकार करने, ठेका अपनाने और फर्म के हस्तांतरण की प्रक्रिया में गंभीर प्रक्रियागत खामियां दर्ज कीं।