‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ गाने वाले सुनील लोधी की जिंदगी में लौटेगी रोशनी! शुरू हुआ आंखों का इलाज
ट्रेनों में भजन गाकर सफर शुरू करने वाले जन्मजात दृष्टिबाधित गायक को मिली देशभर में पहचान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी कर चुके हैं एक लाख रुपये की सहायता का ऐलान; शीर्ष नेत्र विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार शुरू
भोपाल। फिल्म ‘हनुमान अंश’ के लोकप्रिय भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ को अपनी आवाज देकर लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले बुंदेली लोकगायक सुनील लोधी की जिंदगी में अब एक नई उम्मीद ने दस्तक दी है। जन्म से दृष्टिबाधित सुनील की आंखों के इलाज की प्रक्रिया शुरू हो गई है। फिल्म की निर्माता अनुप्रिया नागर ने उनकी आंखों का इलाज कराकर उन्हें दुनिया दिखाने का जो वादा किया था, अब वह पूरा होता दिखाई दे रहा है। शीर्ष नेत्र विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में सुनील का उपचार शुरू किया गया है। उनकी इस नई शुरुआत से परिवार, प्रशंसकों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर है।
सुनील लोधी की कहानी संघर्ष, हुनर और हौसले की मिसाल है। मध्य प्रदेश के सागर जिले के छोटे से गांव अगरा के रहने वाले सुनील जन्म से ही देख नहीं सकते, लेकिन संगीत के प्रति उनके जुनून ने कभी उनकी राह नहीं रोकी। उन्होंने अपनी आवाज को ही अपनी दुनिया बनाया और ट्रेनों में भजन गाकर लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने का सफर शुरू किया। उनकी प्रतिभा को फिल्म ‘हनुमान अंश’ में मौका मिला और ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ भजन ने उन्हें व्यापक लोकप्रियता दिलाई।
अनुप्रिया नागर ने किया था आंखों का इलाज कराने का वादा
फिल्म ‘हनुमान अंश’ की निर्माता अनुप्रिया नागर सुनील की आवाज और उनके संघर्ष से काफी प्रभावित हुई थीं। सुनील की गायकी को फिल्म में अवसर देने के साथ ही उन्होंने उनके जीवन की सबसे बड़ी चुनौती को भी समझा। जन्म से दृष्टिबाधित होने के कारण सुनील आज तक अपनी आंखों से इस खूबसूरत दुनिया को नहीं देख पाए हैं। अनुप्रिया नागर ने उनसे वादा किया था कि वह उनकी आंखों का इलाज कराने का प्रयास करेंगी, ताकि सुनील भी दुनिया को अपनी आंखों से देख सकें।
अब अनुप्रिया नागर की इस पहल के बाद सुनील के उपचार की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शीर्ष नेत्र विशेषज्ञों के नेतृत्व में उनका इलाज कराया जा रहा है। सुनील ने भी सोशल मीडिया पर उपचार शुरू होने से जुड़ी तस्वीरें साझा कर इस नई उम्मीद के लिए आभार जताया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी बढ़ाया था मदद का हाथ
सुनील लोधी की प्रतिभा और संघर्ष की कहानी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक भी पहुंची थी। 4 सितंबर 2026 को भोपाल में मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान सुनील ने अपना लोकप्रिय भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ सुनाया था। उनकी गायकी से प्रभावित मुख्यमंत्री ने उनकी सराहना करते हुए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। साथ ही उनके इलाज और शिक्षा के लिए हरसंभव मदद उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया था।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर सुनील के स्वास्थ्य परीक्षण और आंखों के उपचार की संभावनाओं को लेकर प्रयास किए गए।
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भी हुई आंखों की जांच
सुनील के उपचार को लेकर सागर जिला प्रशासन ने भी पहल की। कलेक्टर दिलीप कुमार यादव के प्रयासों से बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में उनका स्वास्थ्य परीक्षण और आंखों की विस्तृत जांच कराई गई। इसके बाद सुनील ने कलेक्टर से मुलाकात भी की। चिकित्सकीय परीक्षण के माध्यम से उनकी आंखों की स्थिति और उपचार की संभावनाओं का आकलन किया गया।
अब विशेषज्ञ चिकित्सकों के मार्गदर्शन में उपचार शुरू होने से सुनील और उनके परिवार की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
सुनील ने सोशल मीडिया पर साझा की भावुक अपील
आंखों के उपचार की प्रक्रिया शुरू होने के बाद सुनील लोधी ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रशंसकों और शुभचिंतकों से अपने लिए दुआ करने की अपील की। सुनील के लिए यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि जीवन की उस सबसे बड़ी इच्छा के पूरा होने की उम्मीद है, जिसका इंतजार उन्होंने और उनके माता-पिता ने वर्षों से किया है।
एक आवाज ने दिल जीता, अब दुनिया देखने की उम्मीद
सुनील लोधी की कहानी यह बताती है कि प्रतिभा शारीरिक सीमाओं की मोहताज नहीं होती। जिस आवाज ने ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ भजन के जरिए लाखों लोगों को भक्ति से जोड़ दिया, उसी आवाज के मालिक की जिंदगी में अब रोशनी आने की उम्मीद जगी है। अनुप्रिया नागर की पहल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सहयोग और चिकित्सकों के प्रयासों ने सुनील के जीवन में नई आशा जगाई है।
हालांकि, उपचार के बाद उनकी दृष्टि में कितना सुधार होगा और क्या वह पूरी तरह देख सकेंगे, इस बारे में अभी चिकित्सकीय पुष्टि होना बाकी है। फिलहाल उनके प्रशंसकों की यही कामना है कि सुनील जल्द अपनी आंखों से उस दुनिया को देख सकें, जिसे अब तक उन्होंने केवल दूसरों के शब्दों और अपनी कल्पनाओं में महसूस किया है।

