नवरात्रि में ममता की महाशक्ति: मांएं बनेंगी दूसरे नवजातों की जीवनदात्री, 8 नए मदर मिल्क बैंक से मिलेगी संजीवनी
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश के आठ शहरों में शुरू होंगे मदर मिल्क बैंक
भोपाल। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। मां को सृजन, शक्ति और जीवन की प्रतीक माना जाता है। इसी ममता और जीवनदायिनी शक्ति का एक अनूठा रूप मध्यप्रदेश में देखने को मिल रहा है, जहां कुछ मांएं अपने शिशुओं के साथ-साथ उन नवजातों के जीवन को भी संवार रही हैं, जिन्हें किसी कारणवश अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। इन माताओं का अतिरिक्त दूध अन्य शिशुओं के लिए पोषण और जीवन की उम्मीद बन रहा है।
प्रदेश में इस मानव पहल को विस्तार देने की तैयारी है। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) स्थित हमीदिया अस्पताल सहित आठ जगह पर नए मदर मिल्क बैंक शुरू किए जाने की योजना है। इन बैंकों के शुरू होने से समय से पहले जन्म लेने वाले, कम वजन वाले और मां के दूध से वंचित नवजातों को सुरक्षित डोनर मानव मिल्क उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। हर नए बैंक में 30 लीटर दूध जमा करने की क्षमता होगी। इस तरह आठों बैंकों में कुल 240 लीटर दूध सुरक्षित रखने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
ममता का ऐसा दान, जो बचा रहा नन्ही जान
मां के दूध को नवजात के लिए सर्वोत्तम पोषण माना जाता है। खासकर समय से पहले दौड़ने और कम वजन वाले बच्चों के लिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। लेकिन कई बार मां की बीमारी, दूध की अपर्याप्त उपलब्धता या अन्य शारीरिक परिस्थितियों के कारण शिशु को पर्याप्त मां का दूध नहीं मिल पाता। ऐसे में मदर मिल्क बैंक की भूमिका अहम हो जाती है।
यहां स्वस्थ मां से जरूरी जांच और स्क्रीनिंग के बाद अतिरिक्त दूध इकट्ठा किया जाता है। निर्धारित प्रक्रिया से सुरक्षित बनाने के बाद इस दूध को उगाने तक पहुंचाया जाता है। इस तरह एक मां का अतिरिक्त दूध किसी दूसरी मां के बच्चे के लिए भी जीवन की नई उम्मीद बन सकता है।
मध्यप्रदेश में पिछले सात दशकों के दौरान करीब 3,930 माताओं ने 916 लीटर से अधिक दूध दान किया। इस पहल से लगभग 6,100 शिशुओं को लाभ मिला और उनके जीवन की रक्षा में मदद मिली। ये आंकड़े बताते हैं कि जागरूकता, चिकित्सा व्यवस्था और मातृत्व की भावना मिलकर कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
710 ग्राम के शिशु को मिला दूसरी मां के दूध का सहारा
मदर मिल्क बैंक की उपयोगिता भोपाल के एक मामले से समझी जा सकती है। यहां 23 वर्षीय ज्योति ने समय से पहले एक बच्चे को जन्म दिया। जन्म के समय उसका वजन महज 710 ग्राम था। बहुत कम वजन होने के कारण उसे नवजात गहन चिकित्सा इकाई (नीसीयू) में भर्ती करना पड़ा।
कुछ दिनों बाद बच्चे का वज़न बढ़ाकर 610 ग्राम रह गया। दूसरी ओर, ज्योति को पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं बन पा रहा था। ऐसे मुश्किल समय में मदर मिल्क बैंक से सुरक्षित डोनर मिल्क उपलब्ध कराया गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसके बाद बच्चे का वजन बढ़कर 1,155 ग्राम तक पहुंच गया। यह उदाहरण बताता है कि समय से पहले स्ट्रेचिंग और बहुत कम वजन वाले बच्चों की देखभाल में सुरक्षित डोनर मिल्क कितना महत्वपूर्ण सहारा बन सकता है। हालांकि, ऐसे शिशुओं की सेहत में सुधार उनकी संपूर्ण शारीरिक देखभाल और अन्य उपचारों पर भी निर्भर करता है।
इन आठ शहरों में शुरू होंगे नए मदर मिल्क बैंक
प्रदेश में मदर मिल्क बैंक की सुविधा का विस्तार करने के लिए आठ जगहों पर व्यवस्था विकसित की जा रही है। इनमें शामिल हैं—
भोपाल — गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी), हमीदिया अस्पताल
जबलपुर
रीवा
खरगोन
मुरैना
बड़वानी
विदिशा
खंडवा
प्रत्येक बैंक में 30 लीटर दूध संग्रहित करने की क्षमता प्रस्तावित है। इस प्रकार सभी आठ बैंकों की कुल संग्रहण क्षमता 240 लीटर होगी। नए बैंक शुरू होने से नवजातों के लिए सुरक्षित डोनर दूध की उपलब्धता बढ़ाने और इस सुविधा को अधिक क्षेत्रों तक बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
जांच से लेकर सुरक्षित भंडारण तक, हर चरण पर सावधानी
मदर मिल्क बैंक में दूध इकट्ठा करने से लेकर नवजात को उपलब्ध कराने तक कई महत्वपूर्ण आदत का पालन किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जीवनशैली बच्चों को सुरक्षित दूध मिल सके।
पहला चरण : मां की स्वास्थ्य जांच
दूध दान करने वाली मां के स्वास्थ्य की जांच और आवश्यक स्क्रीनिंग की जाती है, ताकि दूध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित मानकों का पालन हो सके।
दूसरा चरण: दूध का पेस्ट बनाना
इकट्ठा किए गए दूध को निर्धारित तापमान पर गर्म करके पाश्चराइज किया जाता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इसमें दूध को 62.5 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 30 मिनट तक गर्म किया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य संभावित हानिकारक सब्जियों को निष्क्रिय करना है।
तीसरा चरण : सुरक्षित भंडारण
पाश्चराइजेशन के बाद दूध को ठंडा करके तय सुरक्षित तापमान पर रखा जाता है। भंडारण और उपयोग के दौरान तय मानकों का पालन किया जाता है।
चौथा चरण : स्वैच्छिक नवजात को उपलब्धता
डॉक्टर की सलाह और शिशु की मेडिकल ज़रूरत के अनुसार सुरक्षित डोनर मिल्क उपलब्ध कराया जाता है। इस तरह दूध की उपलब्धता न होने की स्थिति में नवजात को पोषण का एक महत्वपूर्ण विकल्प मिल सकता है।
मातृत्व की संवेदना को नई पहचान
मदर मिल्क बैंक की अवधारणा केवल चिकित्सा सुविधा तक सीमित नहीं है। यह माँ के बीच संवेदना, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी का भी उदाहरण है। एक माँ अपने बच्चे की ज़रूरत पूरी करने के बाद अतिरिक्त दूध दान करती है, तो उसका लाभ किसी ऐसे परिवार तक पहुँच सकता है, जो अपने नवजात के पोषण को लेकर कठिन परिस्थिति का सामना कर रहा हो।
प्रदेश में नए बैंकों की शुरुआत इसी पहल को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। मध्यप्रदेश में इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ. सलोनी सिडाना के अनुसार, नए मदर मिल्क बैंक शुरू होने से उन लाभार्थियों को फायदा होगा, जिन्हें किसी कारणवश अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता।
नवरात्रि में मां दुर्गा के जीवनदायिनी स्वरूप की आराधना के बीच यह पहल ममता की शक्ति का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आती है। यहां मां का आशीर्वाद केवल अपने बच्चे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूसरे नवजातों के जीवन में भी उम्मीद जगाता है। मां के दूध की हर बूंद किसी नन्हे जीवन को संबल देने का माध्यम बन सकती है।

