आयुष्मान योजना में यूपी के बाद एमपी में सबसे ज्यादा दागी अस्पताल, 462 अस्पतालों की संबद्धता खत्म

 

सख्ती: फर्जीवाड़े के मामलों में कार्रवाई के बाद अब गुणवत्ता मानकों पर भी शिकंजा, चार बड़े शहरों के 90 अस्पतालों में नए मरीजों की भर्ती पर रोक

भोपाल। आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े और अनियमितताओं के मामलों में मध्य प्रदेश देश में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर है। वर्ष 2018 में शुरू हुई योजना के बाद से अब तक मध्य प्रदेश में 462 अस्पतालों को आयुष्मान योजना से असंबद्ध किया जा चुका है। देशभर में असंबद्ध किए गए 3095 अस्पतालों में अकेले मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है। सबसे अधिक 627 अस्पताल उत्तर प्रदेश में योजना से बाहर किए गए हैं।

मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों पर अब दोहरी सख्ती दिखाई दे रही है। एक ओर फर्जीवाड़े और अनियमितताओं के मामलों में अस्पतालों की संबद्धता खत्म की जा रही है, वहीं दूसरी ओर मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों के गुणवत्ता मानकों की भी जांच की जा रही है।

बिलिंग से लेकर आईसीयू भर्ती तक में गड़बड़ी

आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों में उपचार के दौरान कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं। इनमें बिलिंग में गड़बड़ी, जरूरत नहीं होने के बावजूद मरीजों को अस्पताल में भर्ती रखना और सामान्य मरीजों को भी आईसीयू में भर्ती करने जैसे मामले शामिल हैं।

योजना के अधिकारियों के अनुसार, असंबद्ध किए गए अस्पतालों में करीब 80 प्रतिशत ऐसे हैं, जिनके खिलाफ किसी न किसी तरह के फर्जीवाड़े या अनियमितता के मामले सामने आए। करीब 20 प्रतिशत अस्पताल ऐसे हैं, जिन्होंने स्वयं योजना से बाहर होने के लिए आवेदन किया।

फर्जीवाड़े की गंभीर स्थिति में केवल योजना से संबद्धता खत्म करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहती, बल्कि संबंधित अस्पताल के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराई जाती है। भोपाल के सृष्टि अस्पताल के खिलाफ हाल ही में मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने एफआईआर दर्ज की है।

अब गुणवत्ता मानकों पर भी कसा शिकंजा

आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए अब नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) के गुणवत्ता मानकों पर भी जोर दिया जा रहा है।

भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के करीब 90 निजी अस्पताल एनएबीएच का एंट्री-लेवल प्रमाणीकरण भी पूरा नहीं कर पाए हैं। ऐसे अस्पतालों में एक अक्टूबर से नए मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी गई है। संबद्धता समिति की बैठक के बाद इन अस्पतालों को योजना से अंतिम रूप से बाहर करने का निर्णय लिया जाएगा।

चार शहरों में आयुष्मान से जुड़े अस्पतालों की स्थिति देखें तो भोपाल में 226, इंदौर में 91, जबलपुर में 68 और ग्वालियर में 81 अस्पताल संबद्ध थे। एनएबीएच मानक पूरा नहीं करने के कारण कार्रवाई की जद में आए अस्पतालों में सबसे अधिक 46 भोपाल के हैं।

पहले से 247 अस्पताल हो चुके हैं बाहर

इन चार शहरों में अब तक आयुष्मान योजना से असंबद्ध किए जा चुके अस्पतालों की संख्या भी बड़ी है। भोपाल में 92, इंदौर में 62, जबलपुर में 51 और ग्वालियर में 42 अस्पताल योजना से बाहर किए जा चुके हैं। यानी इन चार प्रमुख शहरों में ही अब तक 247 अस्पतालों की संबद्धता खत्म की जा चुकी है।

किस राज्य में कितने अस्पताल असंबद्ध

राज्य-असंबद्ध अस्पताल

उत्तर प्रदेश-627

मध्य प्रदेश-462

गुजरात-364

बिहार-227

छत्तीसगढ़-174

झारखंड-136

एनएबीएच क्या है और क्यों जरूरी?

एनएबीएच यानी नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, स्टाफ की योग्यता, उपचार की प्रक्रिया, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य व्यवस्थाओं के निर्धारित मानकों का आकलन करता है।

सरकार का तर्क है कि आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को केवल मुफ्त या कैशलेस उपचार उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित इलाज भी मिलना चाहिए। इसी वजह से योजना से जुड़े अस्पतालों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों को लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।

अस्पतालों का दावा- प्रमाणीकरण में 25 से 30 लाख तक खर्च

निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि एनएबीएच प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अस्पतालों को अतिरिक्त स्टाफ, उपकरण, दस्तावेजी व्यवस्था और अन्य संसाधनों पर खर्च करना पड़ता है। अस्पताल संचालकों के अनुसार, इस प्रक्रिया में करीब 25 से 30 लाख रुपये तक अतिरिक्त खर्च आ सकता है।

अस्पताल संचालकों की चिंता यह भी है कि आयुष्मान योजना के भुगतान में देरी के बीच प्रमाणीकरण का अतिरिक्त खर्च उनके लिए आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है।

अगस्त तक हुआ भुगतान, आपत्ति वाले मामलों की ऑडिट के बाद होगी जांच

आयुष्मान भारत योजना के सीईओ अरविंद शाह के अनुसार, अस्पतालों को अगस्त तक का भुगतान किया जा चुका है। इसके बाद जिन अस्पतालों का भुगतान लंबित है, उनमें वे मामले शामिल हैं जिनके भुगतान को लेकर कुछ आपत्तियां हैं। इन मामलों का ऑडिट होने के बाद भुगतान किया जाएगा। उनके मुताबिक ये मामले भी पिछले दो-तीन महीने की अवधि के हैं।

एंट्री-लेवल एनएबीएच प्रमाणीकरण नहीं होने के कारण चार शहरों के करीब 90 अस्पतालों में नए मरीजों की भर्ती पर रोक लगाई गई है।

चार शहरों में कितने एनएबीएच अस्पताल

आयुष्मान योजना से जुड़े प्रमुख शहरों में एनएबीएच अस्पतालों की संख्या देखें तो भोपाल में 69, इंदौर में 36, जबलपुर में 51 और ग्वालियर में 42 अस्पताल हैं।

आयुष्मान भारत योजना के आठ वर्ष पूरे होने के बाद सामने आई यह स्थिति बताती है कि अब योजना का फोकस केवल अधिक से अधिक अस्पतालों को जोड़ने तक सीमित नहीं है। फर्जीवाड़े और अनियमितताओं पर कार्रवाई के साथ अस्पतालों की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और उपचार के मानकों को भी संबद्धता का अहम आधार बनाया जा रहा है।