हाजिरी सुधारने के नाम पर सफाईकर्मी से रिश्वत लेते रंगे हाथों धरा गया नगरनिगम का सुपरवाइजर, लोकायुक्त ने किया ट्रैप
सतना नगर निगम में लोकायुक्त का ट्रैप, हाजिरी सुधारने के नाम पर 2 हजार की रिश्वत लेते सुपरवाइजर गिरफ्तार
सफाईकर्मी से मांगे थे 3 हजार रुपये, पहले ही ले चुका था एक हजार; बिरला हॉस्पिटल के सामने लोकायुक्त रीवा की टीम ने की कार्रवाई
सतना। मध्य प्रदेश के सतना नगर निगम में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। लोकायुक्त रीवा की टीम ने रविवार को कार्रवाई करते हुए नगर निगम के सुपरवाइजर बालकृष्ण आदिवासी (30) को 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोप है कि सुपरवाइजर ने एक सफाईकर्मी की हाजिरी पूरी दर्ज करने के बदले रिश्वत मांगी थी। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की।
हाजिरी सुधारने के लिए मांगे थे 3 हजार रुपये
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता राजकिशोर समुंद्रे सतना नगर निगम के वार्ड नंबर 15 में सफाईकर्मी के रूप में कार्यरत हैं। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उन्होंने सितंबर महीने में 25 दिन काम किया, लेकिन उपस्थिति रजिस्टर में उनकी हाजिरी कम दर्ज की गई।
जब उन्होंने इस संबंध में अपने सुपरवाइजर बालकृष्ण आदिवासी से बात की, तो कथित तौर पर हाजिरी पूरी दर्ज कराने के बदले 3 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। इसके बाद सफाईकर्मी ने लोकायुक्त कार्यालय रीवा पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के सत्यापन के बाद बिछाया जाल
शिकायत मिलने पर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा के निर्देश पर शिकायत का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर शिकायतकर्ता से पहले ही एक हजार रुपये ले चुका था।
इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने ट्रैप दल गठित किया। तय कार्रवाई के तहत टीम ने बिरला हॉस्पिटल के सामने सुपरवाइजर को शिकायतकर्ता से बाकी 2 हजार रुपये लेते हुए पकड़ लिया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधन अधिनियम, 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। लोकायुक्त पुलिस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।
इस कार्रवाई के बाद नगर निगम के कामकाज में कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मामले में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।

