करोड़पति निकला इंदौर का प्रधान आरक्षक, 15 ठिकानों पर लोकायुक्त की एक साथ कार्रवाई

 

इंदौर के प्रधान आरक्षक के 15 ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, 6.26 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति का दावा

देवास से इंदौर तक एक साथ पहुंचीं टीमें, पत्नी-मां और अन्य महिला के नाम पर संपत्तियों की जांच; फ्लैट, प्लॉट, कृषि भूमि और लग्जरी वाहनों से जुड़े दस्तावेज खंगाले

इंदौर/देवास। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के तहत लोकायुक्त पुलिस ने इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार, 14 अक्टूबर को सुबह छह बजे लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीमों ने देवास, इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में एक साथ 15 ठिकानों पर सर्चिंग शुरू की। प्रारंभिक जांच में प्रधान आरक्षक की ज्ञात वैध आय की तुलना में 6.26 करोड़ रुपये से अधिक की अनुपातहीन संपत्ति होने का दावा किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, संपत्तियों के दस्तावेज, जमीनों के सौदे, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

कार्रवाई का दायरा केवल प्रधान आरक्षक के आवास तक सीमित नहीं है। जांच टीमों ने परिजनों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के नाम पर खरीदी गई बताई जा रही संपत्तियों, फ्लैटों, भूखंडों, कृषि भूमि और व्यावसायिक परिसंपत्तियों से जुड़े ठिकानों को भी जांच के दायरे में लिया है।

1.93 करोड़ की वैध आय, संपत्ति 6.26 करोड़ से अधिक होने का दावा

लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच के अनुसार, फिरोज खान की वैध स्रोतों से आय लगभग 1.93 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें करीब 75 लाख रुपये वेतन से प्राप्त आय बताई गई है। इसके मुकाबले अनुपातहीन संपत्ति का मूल्य 6.26 करोड़ रुपये से अधिक होने का दावा है।

प्रारंभिक आकलन में संपत्ति ज्ञात वैध आय से लगभग 223 प्रतिशत अधिक बताई गई है। यही अंतर जांच का प्रमुख आधार है। हालांकि, संपत्ति का अंतिम मूल्यांकन, उसके वास्तविक स्वामित्व और आय के स्रोतों का निर्धारण दस्तावेजों के परीक्षण तथा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

पत्नी, मां और अन्य महिला के नाम पर संपत्तियों की पड़ताल

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिरोज खान ने अपनी पत्नी, मां और रोशनी वर्मा नामक महिला के नाम पर विभिन्न संपत्तियां खरीदी हैं। लोकायुक्त टीम इन संपत्तियों की खरीद, भुगतान के स्रोत और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है।

इंदौर की स्कीम नंबर 94 स्थित मनोरमा अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 102 और 202 को शिकायत में आरोपी की मां वहीदा खान के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों के रूप में उल्लेखित किया गया है। इसके अलावा, इंदौर की श्रीनगर कॉलोनी स्थित श्रीदेवी अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 505 और बाणगंगा क्षेत्र के महेश यादव नगर स्थित रोशनी वर्मा के आवास को भी सर्चिंग के दायरे में शामिल किया गया।

जांच का अहम पहलू यह है कि संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल की गई रकम कहां से आई और क्या उसका संबंध आरोपी की ज्ञात आय से है। इसका जवाब संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच से सामने आएगा।

विवादित जमीनों के सौदों में हस्तक्षेप के भी आरोप

प्रधान आरक्षक के खिलाफ शिकायत में ड्यूटी से लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और पुलिस विभाग में पदस्थ होने का प्रभाव दिखाकर देवास क्षेत्र में विवादित जमीनों तथा प्लॉटों के मामलों में हस्तक्षेप करने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर अन्य व्यक्तियों के माध्यम से जमीनों के लेन-देन में शामिल होने की बात कही है।

इसके साथ ही कई वाहन होने और लकड़ी का कारोबार करने संबंधी आरोप भी शिकायत में शामिल हैं। देवास स्थित आवास के पास एक नए मकान का निर्माण होने का उल्लेख भी किया गया है।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रत्येक संपत्ति के साथ आरोपी के संबंध का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल लोकायुक्त टीम संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद के रिकॉर्ड और उपलब्ध वित्तीय साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।

फ्लैट से कृषि भूमि तक, इन संपत्तियों पर नजर

लोकायुक्त की कार्रवाई में शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों की संपत्तियां शामिल हैं। देवास के आदर्श नगर स्थित आरोपी के बताए गए आवास और कॉलोनी के एक अन्य मकान के अलावा इंदौर के फ्लैटों की जांच की जा रही है।

देवास में पुष्पकुंज कॉलोनी के भूखंड, देवास विकास प्राधिकरण की विजय नगर कॉलोनी में एचआईजी जूनियर भवन नंबर 34 तथा इंदिरा गांधी नगर कॉलोनी के प्लॉट नंबर 28 और 29 भी तलाशी के दायरे में बताए गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में देवास जिले की बागली तहसील के ग्राम गजीपुरा में सर्वे नंबर 142 और 82 की कृषि भूमि, सांवेर तहसील के ग्राम गुरान में विभिन्न सर्वे नंबरों की जमीन तथा देवास जिले के ग्राम जेतपुरा और गद्दूखेड़ी की भूमि की जांच की जा रही है। जेतपुरा में देवास बायपास के पास स्थित व्यावसायिक भूखंड और गांव की ओर जाने वाले मार्ग के अंदर की कृषि भूमि भी सूची में शामिल है।

इसके अलावा, देवास के राधागंज क्षेत्र में आरोपी के चालक नफीस खान के आवास और अन्य संबंधित ठिकानों पर भी सर्चिंग की जानकारी सामने आई है।

लग्जरी वाहन और व्यावसायिक फर्मों के रिकॉर्ड भी जांच में

लोकायुक्त टीम ने देवास के गायत्री शक्तिपीठ के पास स्थित फिरोज खान के पैतृक मकान सहित विभिन्न स्थानों पर संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इंदौर और देवास में कई प्लॉट, दुकानें, फ्लैट, कृषि भूमि, लग्जरी वाहनों तथा व्यावसायिक फर्मों से संबंधित कागजात भी जांच में शामिल हैं।

इन दस्तावेजों से संपत्तियों की खरीद की तारीख, भुगतान की रकम, स्वामित्व और वित्तीय स्रोतों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि संबंधित संपत्तियां आरोपी की ज्ञात आय के अनुरूप हैं या नहीं।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई

लोकायुक्त की यह कार्रवाई महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देशन तथा उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह और लोकायुक्त इंदौर के पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के मार्गदर्शन में की गई।

फिलहाल कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शिकायत में बताए गए ठिकानों से संपत्ति और वित्तीय लेन-देन से संबंधित साक्ष्य जुटाना है। तलाशी में मिले दस्तावेजों के परीक्षण और संपत्तियों के मूल्यांकन के बाद मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

अब जांच के तीन अहम सवाल: संपत्तियों की खरीद के लिए रकम कहां से आई? परिजनों और अन्य व्यक्तियों के नाम पर दर्ज संपत्तियों का वास्तविक वित्तीय स्रोत क्या है? और प्रारंभिक जांच में सामने आए अनुपातहीन संपत्ति के आकलन की पुष्टि दस्तावेजों से होती है या नहीं? इन सवालों के जवाब लोकायुक्त की आगे की जांच से सामने आएंगे।