आईपीएस अवार्ड की दौड़ में बड़ा फेरबदल: दो अफसर बाहर, दो के लिफाफे बंद; फिलहाल सात को मिल सकता है प्रमोशन
भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) के अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नति देने के लिए गुरुवार को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
डीपीसी में वर्ष 1997 और 1998 बैच के कुल 27 अधिकारियों के नामों पर विचार किया गया। नौ अधिकारियों को आईपीएस अवार्ड देने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई, लेकिन अंतिम चरण में दो अधिकारियों के प्रकरण लंबित होने और दो नामों के बाहर होने से फिलहाल केवल सात अधिकारियों को ही आईपीएस अवार्ड मिलने की संभावना है।
दो अफसरों के लिफाफे बंद
सूत्रों के मुताबिक, अधिकारी अमृत मीणा के जाति प्रमाण-पत्र से जुड़े मामले और राजेश कुमार मिश्रा के लंबित प्रकरण के कारण दोनों के नामों को “सीलबंद लिफाफा प्रक्रिया” के तहत रखा गया है। यदि भविष्य में इनके मामले सुलझ जाते हैं, तो इन बंद लिफाफों को खोलकर उनके दावों पर विचार किया जा सकेगा।
सीताराम ससत्या और संदीप मिश्रा हुए बाहर
डीपीसी की प्रक्रिया के दौरान वरिष्ठता सूची में शामिल रहे सीताराम ससत्या और संदीप मिश्रा के नाम अंतिम चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं। इससे नौ के बजाय सात अधिकारियों के आईपीएस अवार्ड का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है।
उम्र बनी इंडक्शन ट्रेनिंग में बाधा
जानकारी के अनुसार, जिन अधिकारियों को इस बार आईपीएस अवार्ड मिलेगा, उनमें से कुछ अनिवार्य इंडक्शन ट्रेनिंग में शामिल नहीं हो सकेंगे। इसकी वजह उनकी आयु है। ये अधिकारी लगभग 56 वर्ष की उम्र में आईपीएस सेवा में पदोन्नत होंगे, जिसके कारण प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेना उनके लिए संभव नहीं होगा।
इन अधिकारियों के नामों पर हुआ विचार
डीपीसी में वर्ष 1997 बैच के सीताराम ससत्या और अमृत मीणा तथा वर्ष 1998 बैच की निमिषा पांडे, राजेश कुमार मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा पाठक सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सव्यसांची सर्राफ, समर वर्मा, सत्येंद्र सिंह तोमर, अंजना तिवारी, मनोज कुमार केडिया सहित अन्य अधिकारियों के नामों पर विचार किया गया।

