पच्चीस जिलों में नहीं मिला कोई राहवीर, देवास पूरे मप्र में अव्वल

राहवीर बनने में पच्चीस जिलों  में किसी ने नहीं दिखाई रुचि, देवास सबसे अव्वल

 

विकास तिवारी, भोपाल

मध्यप्रदेश के पच्चीस जिलों में किसी ने भी राहवीर योजना में कोई रुचि नहीं दिखाई है। वहीं मध्यप्रदेश का देवास जिला पांच प्रकरणों में गोल्डन ऑवर में सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने आगे आने वालों को पुरस्कृत कर पूरे प्रदेश में सिरमौर बन गया है। पूरे प्रदेश के तीस जिलों मेें अब तक 54 राहवीर इस योजना के तहत पुरस्कार के लिए चयनित किए गए है।

भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे जिले इस योजना के क्रियान्वयन में काफी पीछे रह गए है। राजधानी भोपाल में राहवीर योजना में अब तक एक प्रकरण भी नहीं बना है। वहीं ग्वालियर और जबलपुर में दो-दो प्रकरणों में राहवीर योजना में घायलों की मदद करने वालों को पच्चीस हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया है।

आमतौर पर सड़क दुर्घटनाओं में घायल होंने वाले नागरिकों की मदद करने के लिए आम नागरिक इसलिए आगे नहीं आते क्योंकि मदद करने के बाद उन्हें पुलिसिया जांच, बयान और कोर्ट की कार्यवाही में गवाही देने के लिए आना-जाना पड़ता है। इसमें उन्हें समय भी देना पड़ता है और उनका धन भी खर्च होता है। आमजन के इस डर को समाप्त करने और सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने राहवीर योजना शुरु की है। इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायलों को दुर्घटना के एक घंटे के भीतर गोल्डन ऑवर में तुरंत अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, ट्रामा सेटर पहुंचाने वाले मददगार को राहवीर उपाधि दी जाती है और पच्चीस हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है। दुघटना के तुरंत बाद का यह बेहद कीमती समय जब मरीज को अस्पताल पहुंचाने से जान बचने की संभावना सबसे ज्यादा होती है उसे गोल्डन ऑवर माना जाता है।

इस योजना के तहत सहायता करने वाले आम नागरिकों कोई अनावश्यक पूछताछ नहीं होती है या उन्हें कानूनी डर का सामना नहीं करना पड़ता है। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की गाइडलाईन के हिसाब से मध्यप्रदेश सरकार ने कैबिनेट बैठक में चर्चा कर 21 अप्रैल 2025 से यह योजना पूरे प्रदेश में लागू की थी। गोल्डन ऑवर में चिकित्सीय सहायता मिलने से घायलों की जान बचाना आसान होता है।

राहवीर योजना के तहत पूरे राज्य से चयनित राहवीरों में से दस सबसे योग्य राहवीरों को राष्ट्रीय स्तर पर भी एक-एक लाख रुपए का पुरसकार प्रदान किया जाता है। राहवीर का चयन जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित एक समिति द्वारा किया जाा है। इस समिति में संबंधित थाने, अस्पताल या ट्रामा सेंटर से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर प्रयेक प्रकरण की समीक्षा की जाती है। मूल्यांकन समिति में कलेक्टर, एसएसपी, सीएमएचओ तथा आरटीओ शामिल रहते है। यह समिति मासिक बैठक में प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा कर योग्य राहवीरों का चयन करती है।

एक राहवीर को इस योजना के तहत साल में पांच बार सम्मान के लिए चयनित किया जा सकता है।

देवास, विदिशा, अनूपपुर, खरगौन जैसे जिले अव्वल-

देवास में अब तक पांच, विदिशा, अनूपपुर और खरगौन में चार-चार, खंडवा में तीन, श्योपुर, बालाघाट, सिवनी, उमरिया,ग्वालियर, बड़वानी, पन्ना, शिवपुरी और जबलपुर में दो-दो तथा मंडला, उज्जैन, झाबुआ, कटनी,मंदसौर, सतना, नर्मदापुरम, गुना, भिंड, इंदौर, धार, बैतूल, रीवा, बुरहानपुर, सागर और नरसिंहपुर में एक-एक व्यक्ति को राहवीर योजना के तहत सम्मानित किया गया है।