रहवासी क्षेत्रों में दुकानों पर दिखावे की कार्यवाही, रहवासियों का गुस्सा फूटा
*नगर निगम की दिखावी कार्यवाही पर रहवासीय का फूटा ग़ुस्सा,भोपाल नगर निगम के ख़िलाफ़ सड़को पर उतरे रहवासी*
*रहवासी समितियों की राजनीतिक दलों को खुली चेतावनी, भोपाल में 95% मतदाता रहवासी है जो नेता हमारे विरोध में आज है कल उसके विरोध में हम*
*नगर निगम की अवैध दुकानों पर कार्रवाई केवल दिखावा, सीलिंग के दावे के बावजूद अधिकांश संस्थान फिर खुले*
*रसूखदारों के संस्थानों पर नरमी के आरोप, रहवासी बोले निगम और संचालको की मिलीभगत को न्यायलय में करेंगे उजागर*
भोपाल:आवासीय भूखंडों पर संचालित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के विरुद्ध आज गौतम नगर इलाके में संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति, के तत्वाधान में रहवासियों द्वारा पैदल मार्च निकला गया जिसमे लोगो में नगर निगम की दिखावटी कार्यवाही के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है गौतम नगर के अध्यक्ष मोहन खरपते और सोमकांत उमलकर ने बताया की हमारे क्षेत्र में अवैध रूप से बड़ी संख्या में होटल,होस्टल और चाय सुट्टा बार संचालित किया जाता है जिसमे बड़ी संख्या में संधिग्द व्यक्तियों का जमावड़ा देर रात तक लगा होता है जो हमे नारकीय जीवन जीने पर मजबूर करता है| क्षेत्रीय निवासी आदित्य ने बताया मेरे घर के सामने दिनभर में लोग इतनी सिगरेट पीते है की हमारे परिवार के सदस्यों के फेफड़े संक्रमित हो गए है| उपस्तिथ रहवासियों ने शपथ ली की आज जो राजनेता इन अवैध भवनों के संचलाको को समर्थन दे रहे है उन्हें हमारी खुली चेतावनी है की भोपाल का 95% मतदाता इस समस्या से ग्रसित है आज जो पार्टी या नेता हमारे खिलाफ है उनका हमसभी अगले चुनाव में विरोध करेंगे|
पैदल मार्च में शामिल रहे पूर्व आईएएस कविन्द्र कियावत ने इस अराजकता के खिलाफ सभी को एक जुट हो कर लड़ने की अपील की कार्यक्रम में शामिल शाहपुरा समिति की अध्यक्ष शुभ्रा गोयल ने बताया की नगर निगम ने शाहपुरा के अवैध निर्माणों पर आंखे मूंद राखी है जिसको हम उजागर करेंगे|
इस मार्च में रचना नगर,शांति निकेतन, शाहपुरा,गुलमोहर,अरेरा कॉलोनी के बड़ी संख्या में महिलाये, बच्चे,युवा एवं बुजुर्ग एवं अन्य रहवासी शामिल हुए|
भोपाल नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर अतिकम्रण प्रभावित रहवासियों एवं शिकायतकर्ताओं ने गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उनका आरोप है कि निगम ने बड़े स्तर पर कार्रवाई का दावा तो किया, लेकिन वास्तविकता में अधिकांश अवैध व्यावसायिक संस्थान कुछ समय के लिए बंद कराकर छोड़ दिए गए जो शाम होते-होते पुनः संचालित होने लगे।
प्रयास संस्था की अध्यक्ष अपर्णा वाशिष्ट का कहना है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद नगर निगम ने जिन अवैध दुकानों को सील करने का नोटिस जारी किया था, उनके विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके स्थान पर अनेक दुकानों के बाहर एक समान प्रारूप के पोस्टर चस्पा कर दिए गए, जिन पर लिखा था कि *”भोपाल नगर पालिका निगम के आदेशानुसार इस भवन में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी गई हैं।”*
रहवासि कमल राठी का कहना है कि यदि ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं तो यह स्वयं इस बात का संकेत है कि संबंधित भवनों में भू-उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, नगर निगम की कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित रही। उनका आरोप है कि कुछ व्यापारियों ने अस्थायी रूप से प्रतिष्ठान बंद रखे, पोस्टर लगाकर उनकी तस्वीरें निगम को भेज दीं और उसके बाद अधिकांश संस्थान पुनः खुल गए।
रहवासियों ने आशंका व्यक्त की है कि इस प्रकार की कार्रवाई का उद्देश्य वास्तविक अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के बजाय केवल रिकॉर्ड में कार्रवाई दर्शाना हो सकता है। इन सभी तथ्यों को याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी एवं लवनीश भाती द्वारा चार अगस्त को सर्वोच्च न्यायलय की अगली सुनवाई में प्रस्तुत किया जायेगा।
शिकायतकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि नगर निगम की इस लाचार कार्यवाही से प्रभावशाली संचालको के अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बचाने का असफल प्रयास है तभी इन अवैध भवनों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही। इससे आम नागरिकों एवं रहवासियों का जिला प्रशासन पर विश्वास डगमगा चूका है।
नए भोपाल के सभी रहवासी संगठनों ने सामूहिक घोषणा की है कि नगर निगम द्वारा इन सभी अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर निष्पक्ष एवं ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे हर मौहल्ले और आवसीय परिसर में निगम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे तथा न्यायालय में सभी तथ्य प्रस्तुत करेंगे।

