सफलता से सन्नाटे तक: ‘चायवालाज’ के फाउंडर रोहित शर्मा ने की खुदकुशी, छह महीने पहले बंद कर दिए थे सभी कैफे

 

दौसा/जयपुर। कभी चाय के कारोबार में अपनी अलग पहचान बनाने वाले ‘चायवालाज’ स्टार्टअप के संस्थापक रोहित शर्मा अब इस दुनिया में नहीं रहे। राजस्थान के दौसा स्थित अपने घर में उनका शव मिलने से परिवार, कारोबारी जगत और उनके चाहने वालों में शोक की लहर है। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला खुदकुशी का प्रतीत होता है, हालांकि मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

महज 30 साल की उम्र में रोहित शर्मा ने उद्यमिता की ऐसी मिसाल पेश की थी, जिसकी चर्चा पूरे राजस्थान में होती थी। नर्सिंग की पढ़ाई के दौरान उन्होंने 17 वर्ष की उम्र में कारोबार शुरू किया और जयपुर के मानसरोवर में ‘चायवालाज’ का पहला टी कैफे खोला। धीरे-धीरे उनका ब्रांड लोकप्रिय होता गया और राजस्थान के कई शहरों में सात आउटलेट तक पहुंच गया। वर्ष 2022 में उन्हें ग्लोबल इंडिया बिजनेस फोरम की ओर से नेशनल MSME बिजनेस एक्सीलेंस अवॉर्ड भी मिला।

छह महीने पहले लिया था बड़ा फैसला

कारोबार सफलता के शिखर पर था, लेकिन करीब छह महीने पहले रोहित ने अचानक अपने सभी कैफे बंद कर दिए। इसके बाद उनका पूरा ध्यान अध्यात्म की ओर केंद्रित हो गया। उन्होंने आध्यात्मिक विषयों पर किताबें लिखीं, जिनमें ‘तत्सुखे सुखित्वम’ काफी चर्चित रही। सोशल मीडिया पर वे ‘रोहित शिवोहम’ नाम से सक्रिय थे और संतों व धार्मिक विद्वानों के साथ कई पॉडकास्ट भी करते रहे।

समाज सेवा और राजनीति में भी थी रुचि

व्यवसाय के साथ-साथ रोहित समाज सेवा से भी जुड़े रहे। उन्होंने दौसा में जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए ‘मिशन हेल्पलाइन’ की शुरुआत की थी। वर्ष 2024 के दौसा विधानसभा उपचुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन भी दाखिल किया था, हालांकि बाद में नाम वापस लेकर भाजपा का समर्थन किया।

रोहित अपने पीछे पत्नी, सात वर्षीय बेटे और माता-पिता को छोड़ गए हैं। उनके पिता हितेंद्र मोहन शर्मा दौसा में मेडिकल स्टोर का संचालन करते हैं, जबकि उनकी पत्नी एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं।

रोहित शर्मा के निधन की खबर से उनके ग्राहकों, मित्रों और कारोबारी जगत में गहरा दुख है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।